रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल में भ्रष्टाचार के आरोप, अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री निवास में सौंपे ऑडियो साक्ष्य

रायपुर स्थित रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल में कथित भ्रष्टाचार और अवैध लेनदेन के आरोपों को लेकर अधिवक्ता एवं कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर लिखित शिकायत और ऑडियो साक्ष्य सौंपे। उन्होंने निष्पक्ष जांच और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

Jan 30, 2026 - 12:12
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रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल में भ्रष्टाचार के आरोप, अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री निवास में सौंपे ऑडियो साक्ष्य

UNITED NEWS OF ASIA.अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल में कथित रूप से व्याप्त भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोपों को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। अधिवक्ता एवं कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर (पूर्व सदस्य, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल) ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर ट्रिब्यूनल के राजस्व अधिकारी मुकेश ठाकुर एवं कार्यकारी अध्यक्ष गंगाधर पटेल के विरुद्ध लिखित शिकायत प्रस्तुत की।

शिकायत के साथ मनोज सिंह ठाकुर ने एक पेनड्राइव भी सौंपी है, जिसमें उनके अनुसार ट्रिब्यूनल से जुड़े मामलों में पक्ष में आदेश पारित कराने और प्रकरणों के निपटारे के बदले कथित लेनदेन से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है। उन्होंने दावा किया कि यह सामग्री विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त हुई है और इससे ट्रिब्यूनल के भीतर चल रहे कथित भ्रष्टाचार के नेटवर्क का खुलासा होता है।

मुख्यमंत्री निवास में शिकायत सौंपने के पश्चात मीडिया से चर्चा करते हुए मनोज सिंह ठाकुर ने कहा कि रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल वह महत्वपूर्ण संस्था है, जहां मकान मालिक और किरायेदार न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। यदि ऐसे संस्थान में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी ही न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करने का कार्य करें, तो यह बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि एक अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते उनका दायित्व बनता है कि वे न्याय व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने के लिए आवाज उठाएं।

मनोज सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उनके द्वारा सौंपे गए ऑडियो साक्ष्यों की तत्काल फॉरेंसिक जांच कराई जाए, ताकि उनकी सत्यता की पुष्टि हो सके। इसके साथ ही उन्होंने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित राजस्व अधिकारी मुकेश ठाकुर एवं कार्यकारी अध्यक्ष गंगाधर पटेल को जांच अवधि तक पदमुक्त किए जाने की मांग भी की है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में न्यायिक संस्थानों में इस प्रकार की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें शासन स्तर पर होने वाली कार्रवाई और प्रस्तावित जांच पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि यदि साक्ष्य प्रमाणित होते हैं, तो यह प्रकरण न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।