पोराबाई नकल प्रकरण में 17 साल बाद फैसला, छात्रा सहित चार दोषियों को पांच साल की सजा

जांजगीर-चांपा जिले के चर्चित पोराबाई नकल प्रकरण में द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए छात्रा पोराबाई, केंद्राध्यक्ष, स्कूल प्राचार्य सहित चार आरोपियों को पांच-पांच वर्ष की कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2008 की बारहवीं परीक्षा से जुड़ा है।

Jan 30, 2026 - 12:16
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पोराबाई नकल प्रकरण में 17 साल बाद फैसला, छात्रा सहित चार दोषियों को पांच साल की सजा

UNITED NEWS OF ASIA.हितेश पण्डे जांजगीर-चांपा। जिले के बहुचर्चित पोराबाई नकल प्रकरण में करीब 17 वर्ष बाद न्यायालय का अहम फैसला सामने आया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायालय, जांजगीर ने छात्रा पोराबाई, केंद्राध्यक्ष फूलसायन, स्कूल प्राचार्य एस.एल. जाटव तथा दीपक जाटव को दोषी ठहराते हुए सभी को पांच-पांच वर्ष की कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह प्रकरण वर्ष 2008 में आयोजित बारहवीं की परीक्षा से जुड़ा हुआ है, जिसने उस समय प्रदेशभर में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए थे।

जानकारी के अनुसार, बिर्रा निवासी पोराबाई ने वर्ष 2008 की बारहवीं परीक्षा में प्रदेश की प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। परिणाम घोषित होने के बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर को उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर संदेह हुआ, जिसके चलते कॉपियों की विशेष जांच कराई गई। जांच में उत्तर पुस्तिकाओं में गंभीर गड़बड़ियां और दस्तावेजों में हेराफेरी के तथ्य सामने आए।

मामले के उजागर होने के बाद बम्हनीडीह थाना में छात्रा सहित कुल नौ लोगों के विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया था। विवेचना पूर्ण होने पर पुलिस ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, चांपा न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था, जहां पूर्व में सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया था। इसके बाद शासन द्वारा 25 दिसंबर 2020 को उक्त फैसले के विरुद्ध अपील दायर की गई थी।

अपील की सुनवाई करते हुए द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश  गणेश राम पटेल ने प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों और अभिलेखों के आधार पर छात्रा पोराबाई, केंद्राध्यक्ष फूल साय न, प्राचार्य एस.एल. जाटव तथा दीपक जाटव को दस्तावेजों में हेराफेरी और परीक्षा से संबंधित गड़बड़ी का दोषी पाया।

न्यायालय ने अपने निर्णय में टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपियों ने न केवल माध्यमिक शिक्षा मंडल, रायपुर के विरुद्ध अपराध किया है, बल्कि उन छात्रों के भविष्य के साथ भी अन्याय किया है, जिन्होंने ईमानदारी और परिश्रम से अपनी सफलता प्राप्त की थी। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस प्रकार के कृत्य शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को गहरी ठेस पहुंचाते हैं।

न्यायालय के इस फैसले को परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस निर्णय से यह संदेश गया है कि शिक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।