रतलाम मंडल ने रचा इतिहास: पहली बार लॉन्ग हॉल गुड्स ट्रेन का सफल परिचालन
पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने पहली बार लॉन्ग हॉल गुड्स ट्रेन का सफल परिचालन कर नया इतिहास रच दिया। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से इस प्रयोग से समय, संसाधन और क्रू दक्षता में उल्लेखनीय बचत हुई है।
UNITED NEWS OF ASIA. राजेश पुरोहित,रतलाम | पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने मालगाड़ी परिचालन के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय रेलवे के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है। 08 जनवरी 2026 को रतलाम मंडल द्वारा पहली बार लॉन्ग हॉल गुड्स ट्रेन का सफल परिचालन किया गया, जो रेलवे के आधुनिक और कुशल लॉजिस्टिक्स सिस्टम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के माध्यम से रतलाम मंडल ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह न केवल यात्री ट्रेनों के सुरक्षित एवं समयबद्ध संचालन में अग्रणी है, बल्कि माल परिवहन के क्षेत्र में भी नवाचार और दक्षता के नए मानक स्थापित कर रहा है। यह अभिनव प्रयोग समय की अधिकतम उपयोगिता, बेहतर लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और क्रू की कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया।
मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि मंडल रेल प्रबंधक के कुशल मार्गदर्शन तथा परिचालन विभाग के अधिकारियों के निर्देशन में यह लॉन्ग हॉल गुड्स ट्रेन बिलडी स्टेशन से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट के लिए वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से संचालित की गई।
रतलाम मंडल के अनुभवी क्रू ने इस मालगाड़ी को लगभग 400 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 56 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत गति से मात्र 6 घंटे 57 मिनट में न्यू उधना स्टेशन तक पहुँचाया। यह समय सामान्य मार्ग से चलने वाली पारंपरिक मालगाड़ियों की तुलना में करीब 9 से 10 घंटे की उल्लेखनीय बचत को दर्शाता है।
इस लॉन्ग हॉल गुड्स ट्रेन में कुल 87 वैगन शामिल थे, जिनका कुल भार 3842 टन रहा। एक ही क्रू सेट द्वारा पूरे परिचालन को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया, जिससे लगभग 5 क्रू सेट की बचत संभव हुई। यह उपलब्धि कुशल योजना, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से लंबी दूरी तक मालगाड़ी संचालन से बड़ौदा–मुंबई खंड में ट्रेनों के कंजेशन को कम करने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। यह पहल भविष्य में माल परिवहन को और अधिक तेज, सुरक्षित एवं किफायती बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।