मुख्य वन संरक्षक दुर्ग ने बालोद वनमंडल में किया रजत जयंती उपवन का शुभारंभ
वनमंडल बालोद में मुख्य वन संरक्षक (क्षेत्रीय) दुर्ग ने रजत जयंती उपवन का उद्घाटन किया। इस उपवन में कैक्टस जोन, वृक्ष उद्यान, लोटस पॉन्ड और पर्यावरण आधारित वॉल पेंटिंग आकर्षण का केंद्र हैं। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर पुष्पांजली अर्पित की गई और वनरक्षकों को कैंपा द्वारा प्रदत्त उपकरण वितरित किए गए।
UNITED NEWS OF ASIA. परस साहू, बालोद । वनमंडल बालोद में आज एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहल के तहत मुख्य वन संरक्षक (क्षेत्रीय) दुर्ग द्वारा रजत जयंती उपवन का उद्घाटन किया गया। यह उपवन जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर पुष्पांजली अर्पित कर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को नमन किया गया। उद्घाटन समारोह में वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
मुख्य वन संरक्षक ने अपने उद्बोधन में कहा कि “रजत जयंती उपवन न केवल हरियाली का प्रतीक है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने का माध्यम भी है।” उन्होंने कहा कि राज्य शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप वन विभाग जैव विविधता, जलवायु संतुलन और वनों के सतत प्रबंधन की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
इस अवसर पर कैंपा (CAMPA) योजना के अंतर्गत वनरक्षकों को नवीन उपकरण वितरित किए गए, ताकि उनके कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इसमें सुरक्षा सामग्री, संचार उपकरण और गश्त के लिए आवश्यक किट शामिल हैं।
रजत जयंती उपवन में कैक्टस जोन, वृक्ष उद्यान, लोटस पॉन्ड और पर्यावरण एवं वन्यजीवों पर आधारित वॉल पेंटिंग बनाई गई हैं, जो न केवल सौंदर्य बढ़ाती हैं बल्कि जन-जागरूकता का भी माध्यम बनती हैं। यह उपवन बालोद जिले में पर्यावरण पर्यटन को प्रोत्साहन देने का एक नया केंद्र बन सकता है।
वन विभाग ने बताया कि रजत जयंती उपवन के विकास से स्थानीय लोगों में हरियाली और संरक्षण के प्रति नई सोच विकसित हो रही है। विभाग का उद्देश्य है कि इस तरह के उपवनों को प्रदेश के अन्य जिलों में भी विकसित कर “हरित छत्तीसगढ़” के लक्ष्य को साकार किया जाए।
इस अवसर पर विभागीय अधिकारियों ने कहा कि रजत जयंती उपवन आने वाले समय में न केवल पर्यावरण प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि यह बालोद जिले की पर्यावरणीय पहचान को भी सशक्त करेगा।