दीप्ति दुबे ने कहा कि नगर निगम चुनाव में जनता ने अटल विश्वास पत्र में किए गए वादों पर भरोसा जताते हुए भाजपा को भारी बहुमत से जिताया था। लेकिन एक वर्ष बाद भी धरातल पर किसी भी वादे की स्पष्ट तस्वीर नजर नहीं आ रही है।
उन्होंने बताया कि अटल विश्वास पत्र का पहला वादा तात्यापारा–शारदा चौक चौड़ीकरण छह माह के भीतर पूरा करने का था, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। उन्होंने विशेष रूप से तात्यापारा शारदा चौक का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर का प्रमुख चौराहा है, जहां यातायात व्यवस्था अब भी बदहाल बनी हुई है।
अन्य प्रमुख वादों में हर घर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना, सफाई व्यवस्था एवं स्ट्रीट लाइट को सुदृढ़ कर जीरो टॉलरेंस नीति लागू करना, प्रत्येक जोन में खेल मैदान, बाग-बगीचे एवं खेल अकादमी की स्थापना, सड़कों पर घूमने वाले पशुओं से नागरिकों को राहत दिलाना, एस-सिटी ऐप के माध्यम से जोन कार्यालयों की सेवाओं को एकीकृत करना, महिलाओं के नाम पर संपत्ति होने पर प्रॉपर्टी टैक्स में विशेष छूट, स्कूल और कॉलेजों में मुफ्त सेनेटरी पैड वितरण, शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाना तथा स्ट्रीट वेंडरों के लिए व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराना शामिल था।
दीप्ति दुबे ने कहा कि इन वादों के अलावा भी 26 अन्य वादे ऐसे थे जो सीधे आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों से जुड़े हुए थे, लेकिन आज उनका कोई अता-पता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि नैतिक जवाबदेही का भी प्रश्न है। अटल जी का नाम केवल सम्मान का विषय नहीं बल्कि प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उनके नाम से संकल्प लेकर यदि वादे पूरे नहीं किए जाते, तो यह उनके आदर्शों के साथ अन्याय है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई वार्डों में आज भी लोगों को गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। स्वयं भाजपा के पार्षद भी अपने क्षेत्रों में पेयजल संकट को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सफाई व्यवस्था में सुधार के नाम पर केवल ठेकेदारों पर नाममात्र का जुर्माना लगाकर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि स्थायी सुधार की कोई ठोस नीति सामने नहीं आई है।
दीप्ति दुबे ने कहा कि महापौर ने इजराइल, इंदौर सहित अन्य शहरों का दौरा कर व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की बात कही थी, लेकिन रायपुर में उसका असर दिखाई नहीं देता। एक वर्ष में गरीबों के ठेले हटाने, गरीबों के आवास तोड़ने तथा चौपाटी हटाने और बनाने में ही समय निकल गया।
उन्होंने महापौर से आग्रह किया कि बदहाल रायपुर के सुव्यवस्थित विकास के लिए स्पष्ट कार्ययोजना बनाई जाए, ताकि आने वाले समय में नागरिकों को धरातल पर काम दिखाई दे। उन्होंने मांग की कि शहरवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए, गार्डनों को व्यवस्थित किया जाए, बाहरी वार्डों में स्ट्रीट लाइट पोल लगाए जाएं और बेहतर सड़कें दी जाएं।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि 36 वादों में से कोई एक भी वादा पूरा किया गया हो, तो महापौर सार्वजनिक रूप से उसकी जानकारी दें और रायपुर की जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करें।