रायपुर में बंगाली समाज छत्तीसगढ़ की बाल संस्कार पाठशाला, बच्चों को मिल रहे संस्कृति और संस्कार के पाठ
रायपुर के कालीबाड़ी चौक स्थित बंगाली कालीबाड़ी परिसर में बंगाली समाज छत्तीसगढ़ द्वारा पांच दिवसीय ‘बाल संस्कार पाठशाला’ का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में बच्चों को वैदिक मंत्र, भारतीय संस्कृति, व्यक्तित्व विकास, स्वास्थ्य और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े विषयों की जानकारी दी जा रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राजधानी रायपुर के कालीबाड़ी चौक स्थित बंगाली कालीबाड़ी स्कूल परिसर में नवगठित बंगाली समाज छत्तीसगढ़ द्वारा पांच दिवसीय ‘बाल संस्कार पाठशाला’ का आयोजन किया जा रहा है। 20 मई से शुरू हुआ यह आयोजन 24 मई तक चलेगा। इस विशेष पाठशाला का उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और बांग्ला परंपराओं से जोड़ते हुए उनके व्यक्तित्व विकास में योगदान देना है।
सुबह आयोजित होने वाली इस पाठशाला में 6 वर्ष से 13 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की भागीदारी हो रही है। आयोजन में बच्चों को वैदिक मंत्र पाठ, पंचतंत्र, उपनिषद और महाभारत की प्रेरणादायक कहानियों के माध्यम से नैतिक शिक्षा दी जा रही है। इसके साथ ही महापुरुषों की जीवनी, समय प्रबंधन, मोबाइल उपयोग की सीमाएं, स्वास्थ्य से जुड़ी अच्छी आदतें और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर भी जानकारी दी जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को एंकरिंग, कवितापाठ कला, व्यक्तित्व विकास और प्रारंभिक कौशल विकास के टिप्स भी दिए जा रहे हैं। आयोजकों का मानना है कि बच्चों में कम उम्र से ही अच्छे संस्कार और सकारात्मक सोच विकसित करना बेहद जरूरी है, जिससे वे आगे चलकर जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बन सकें।
इस आयोजन का संचालन बंगाली समाज छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष Ranjan Banerjee के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। आयोजन को सफल बनाने में समाज के कई सदस्यों की सक्रिय भूमिका देखी जा रही है। बंगाली कालीबाड़ी के अध्यक्ष Tanmay Chatterjee और सचिव Partha Sarkar द्वारा कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है।
समाज के सचिव Diptesh Chatterjee ने जानकारी दी कि इस नि:शुल्क आयोजन में प्रतिदिन 38 बच्चे भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों और अभिभावकों में कार्यक्रम को लेकर काफी उत्साह है और समाज की ओर से इसे आगे भी जारी रखने की योजना बनाई जा रही है।
कार्यक्रम के संयोजक Pratibhu Banerjee ने आयोजन की सोच को साझा करते हुए कहा कि संस्कार बचपन में दिए जाएं तो उनका प्रभाव जीवनभर बना रहता है। उन्होंने संस्कारों की तुलना बरसात की उस झड़ी से की, जिसका पानी जमीन में गहराई तक पहुंचकर स्थायित्व देता है। उनका कहना है कि कच्ची उम्र में दिए गए संस्कार बच्चों के जीवन और सोच को सकारात्मक दिशा देते हैं।
कार्यक्रम की सपोर्ट टीम का दायित्व संभाल रहे Sanjay Roy ने बताया कि बच्चों के लिए प्रतिदिन पौष्टिक और स्वादिष्ट अल्पाहार की व्यवस्था भी की जा रही है। वहीं समापन समारोह की तैयारियों में Vikramaditya Bose और Soumyakanta Banerjee सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।
24 मई को होने वाले समापन समारोह में Ramakrishna Mission Vivekananda Ashram Raipur के सचिव और वरिष्ठ सन्यासी Swami Yogasthananda की विशेष उपस्थिति रहेगी। आयोजकों को उम्मीद है कि यह पाठशाला बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।