उपसरपंच को लाभ देने के लिए काटा लाखों का बिल, पंचायत सचिव ने मानी गलती

गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत खोखमा में पंचायत सचिव द्वारा निर्वाचित उपसरपंच के नाम पर लाखों रुपये का बिल काटे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि सचिव ने उपसरपंच को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पंचायत के नाम पर बिल जारी किया और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। मामला सामने आने के बाद पंचायत सचिव ने अपनी गलती स्वीकार की है। जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है।

Aug 11, 2026 - 11:06
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उपसरपंच को लाभ देने के लिए काटा लाखों का बिल, पंचायत सचिव ने मानी गलती

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l विकासखंड मैनपुर की ग्राम पंचायत खोखमा में पंचायत सचिव द्वारा निर्वाचित उपसरपंच के नाम पर लाखों रुपये का बिल काटे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत सचिव थानसिंह नायक ने उपसरपंच को प्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पंचायत के नाम पर बिल जारी किया और भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। मामला सामने आने के बाद पंचायत स्तर पर हड़कंप की स्थिति है और ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, पंचायत सचिव द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधि के नाम पर बिल काटकर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इस बिल को लेकर कई तरह की अनियमितताओं की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के संचालन और वित्तीय प्रक्रिया की जिम्मेदारी संभालने वाले सचिव द्वारा यदि नियमों को दरकिनार कर किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है, तो इसकी पूरी जांच आवश्यक है।

मामला सामने आने के बाद पंचायत सचिव थानसिंह नायक ने अपनी गलती स्वीकार की है। सचिव द्वारा गलती माने जाने के बाद अब पूरे प्रकरण में यह पता लगाया जाना जरूरी हो गया है कि आखिर किस मद में और किस कार्य के नाम पर बिल तैयार किया गया था। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि बिल की राशि कितनी थी और भुगतान की प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंची थी।

इस मामले को लेकर जिला पंचायत गरियाबंद के सीईओ प्रखर चंद्राकर ने कहा कि प्रकरण गंभीर है। यदि इस तरह से बिल काटकर किसी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है, तो मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पंचायत में सामने आए इस मामले के बाद ग्रामीणों ने संबंधित दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में होने वाले प्रत्येक वित्तीय कार्य में पारदर्शिता और नियमों का पालन जरूरी है। यदि किसी पदाधिकारी या कर्मचारी द्वारा नियमों का उल्लंघन कर निजी लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित बिल किस मद में और किन कार्यों के लिए काटा गया था, उसकी वास्तविक राशि कितनी थी और भुगतान की प्रक्रिया में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं। जिला पंचायत स्तर से जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।