पाकिस्तान के पंजाब में 100 साल पुराने हिंदू मंदिर को लेकर विवाद, मदरसे में मिलाने का आरोप

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले के सिराज गांव में 100 से 125 साल पुराने हिंदू मंदिर के ढहाए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय अल्पसंख्यक संगठनों का आरोप है कि मंदिर की जमीन को पास के मदरसे में मिलाने के उद्देश्य से इसे गिराया गया, जबकि सरकारी पक्ष ने मंदिर के भारी बारिश के कारण ढहने की बात कही है। मामले में मंदिर की सुरक्षा, मलबा हटाने और कथित रूप से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी है।

Sep 1, 2026 - 08:06
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पाकिस्तान के पंजाब में 100 साल पुराने हिंदू मंदिर को लेकर विवाद, मदरसे में मिलाने का आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले में 100 से 125 साल पुराने एक हिंदू मंदिर के ढहाए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। सिराज गांव में स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर को लेकर स्थानीय हिंदू समुदाय और अल्पसंख्यक संगठनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मंदिर की जमीन को पास के मदरसे के विस्तार में शामिल करने के उद्देश्य से मंदिर को गिराया गया।

करीब 1,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला यह मंदिर लाहौर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित था। स्थानीय स्तर पर इसे क्षेत्र के पुराने हिंदू धार्मिक स्थलों में गिना जाता था। मंदिर के ढहने की घटना के बाद स्थानीय हिंदू समाज और अल्पसंख्यक नेताओं में नाराजगी सामने आई है।

अल्पसंख्यक संगठनों की ओर से आरोप लगाया गया है कि मंदिर को योजनाबद्ध तरीके से गिराया गया। कुछ संगठनों ने इस मामले में कट्टरपंथी तत्वों की भूमिका होने का दावा किया है। रिपोर्ट में प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान से जुड़े लोगों पर भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार की ओर से मंदिर के ढहने को भारी बारिश से जोड़ते हुए इसे प्राकृतिक रूप से गिरने की घटना बताया गया है। इसी विरोधाभासी दावे के कारण मामले की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज हो गई है।

पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी ने पंजाब सरकार से मंदिर ढहाने की घटना की जांच कराने और यदि किसी व्यक्ति या संगठन की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। संगठन ने मंदिर के पुनर्निर्माण और धार्मिक स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है।

पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी के अध्यक्ष असलम परवेज सहोत्रा के अनुसार उन्होंने 28 अगस्त को पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव से मुलाकात कर इस मामले में लिखित आवेदन सौंपा। उन्होंने मंदिर की सुरक्षा में कथित विफलता के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की।

सहोत्रा के अनुसार मंदिर के ढहने के बाद उसके शिखर में लगी धातु, अन्य निर्माण सामग्री और मलबे की ईंटों को भी वहां से हटा दिया गया। इस कारण घटना से जुड़े सवाल और गंभीर हो गए हैं। अल्पसंख्यक संगठनों का कहना है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और उनके संरक्षण के लिए प्रशासन को स्पष्ट कदम उठाने चाहिए।

मंदिर के ढहने की घटना ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक धार्मिक स्थलों की स्थिति को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। स्थानीय संगठनों की मांग है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच हो, मंदिर की जमीन और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए तथा वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

फिलहाल मंदिर के ढहने के वास्तविक कारणों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। एक ओर प्रशासन इसे बारिश के कारण ढहने की घटना बता रहा है, वहीं अल्पसंख्यक संगठनों ने इसे लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मंदिर प्राकृतिक कारणों से ढहा या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।