समूह से जुड़कर मिली उद्यम की राह
मुन्नी बाई बिहान योजना के अंतर्गत महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका गतिविधियों और उद्यम से संबंधित प्रशिक्षण मिला। रायपुर में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी पीएमईजीपी की जानकारी मिली। योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र पहुंचकर व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया और आवश्यकताओं की जानकारी ली।
परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद मुन्नी बाई ने गांव में जमीन लेकर पैक्ड पेयजल प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया। कई चरणों की प्रक्रिया के बाद पीएमईजीपी के तहत करीब 25 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। उपलब्ध सहायता से शेड, बाउंड्री, बोरवेल सहित प्लांट के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार की गईं। इसके बाद प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने ‘एम हेल्प वॉटर’ पैक्ड पेयजल प्लांट शुरू किया।
एक उद्यम से करीब 10 लोगों को रोजगार
मुन्नी बाई का व्यवसाय अब उनके परिवार की आजीविका तक सीमित नहीं है। प्लांट में उनके पति, बेटा-बेटी, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और अन्य कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इससे करीब 10 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। कर्मचारियों को काम के अनुसार प्रशिक्षण दिया गया है और उन्हें 6 से 9 हजार रुपये तक प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। पानी की गुणवत्ता जांच, बोतल भरने, पैकेजिंग और अन्य कार्यों में कर्मचारी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
कई जिलों तक पहुंचा कारोबार
मुन्नी बाई के अनुसार पिछले एक वर्ष में करीब एक से डेढ़ लाख पानी की बोतलों की पैकिंग की जा चुकी है। बैकुण्ठपुर के साथ मनेंद्रगढ़, चिरमिरी, अंबिकापुर, प्रतापपुर, विश्रामपुर, सूरजपुर, भैयाथान और कुदरगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में ‘एम हेल्प वॉटर’ की आपूर्ति की जा रही है।
महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ाव, वित्तीय सहायता, बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और उद्योग विभाग के सहयोग से मुन्नी बाई के उद्यम को आगे बढ़ने का अवसर मिला। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि पीएमईजीपी जैसी योजनाओं ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया।
मुन्नी बाई की कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जब मेहनत, संकल्प और जनभागीदारी से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव एक परिवार से आगे बढ़कर समाज तक पहुंचता है। एक महिला आत्मनिर्भर बनती है, रोजगार के अवसर पैदा करती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान देती है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ की भावना के अनुरूप मुन्नी बाई की यह पहल सेवा, आत्मनिर्भरता और जनभागीदारी की एक प्रेरक तस्वीर प्रस्तुत करती है।