मितानिनों ने सरकार पर वादाखिलाफी का लगाया आरोप, मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ, सक्ती इकाई ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा करने की मांग की। संघ ने आरोप लगाया कि नियमितीकरण और वेतन वृद्धि के वादे अब तक पूरे नहीं किए गए हैं। मांगें पूरी नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी गई।

Jun 25, 2026 - 16:23
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मितानिनों ने सरकार पर वादाखिलाफी का लगाया आरोप, मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

UNITED NEWS OF ASIA. जीके कुर्रे, सक्ती l प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ छत्तीसगढ़ की सक्ती इकाई ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। संघ ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले किए गए वादों को सरकार अब तक पूरा नहीं कर सकी है, जिससे मितानिन, एनएचएम कर्मचारी और आशा कार्यकर्ता स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। मांगें जल्द पूरी नहीं होने पर बड़े स्तर पर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी गई है।

एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन के दौरान संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान जारी घोषणा पत्र और मोदी की गारंटी में मितानिनों, एनएचएम कर्मचारियों और आशा कार्यकर्ताओं को केंद्र सरकार के अधीन नियमित कर्मचारी बनाए जाने तथा उनके वेतन में 50 प्रतिशत वृद्धि करने का वादा किया गया था। उनका आरोप है कि सरकार बनने के बाद इन वादों को लागू करने के बजाय स्वास्थ्य कर्मियों से निजी संस्थाओं के माध्यम से दबावपूर्वक कार्य कराया जा रहा है।

संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था चुनावी घोषणा पत्र के विपरीत है और इससे हजारों स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में मितानिनों और आशा कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है, लेकिन उनकी मांगों और समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

ज्ञापन में सरकार से मांग की गई है कि चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों के अनुरूप मितानिनों, एनएचएम कर्मचारियों और आशा कार्यकर्ताओं के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाए तथा वेतन वृद्धि संबंधी घोषणा को शीघ्र लागू किया जाए। संघ का कहना है कि लंबे समय से कार्य करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सुविधाएं और सुरक्षा नहीं मिल पा रही हैं।

धरना-प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर किया जा रहा है।

संघ के सदस्यों ने कहा कि मितानिन और आशा कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, जनजागरूकता अभियान और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद लंबे समय से उनकी प्रमुख मांगें लंबित हैं।

ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से चुनावी वादों को पूरा करने और स्वास्थ्य कर्मियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की गई है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।