स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस निर्माण के लिए नेशनल हाईवे की करोड़ों की लागत से बनी नाली को पूरी तरह तोड़ दिया गया है। यह नाली हाईवे के जल निकासी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा थी, जिसे हटाने से पूरे इलाके में बारिश के दौरान जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। नागरिकों का कहना है कि जिस स्थान पर यह निर्माण हो रहा है, वह सीधे हाईवे से जुड़ा हुआ क्षेत्र है और यहां किसी भी तरह के निर्माण के लिए वैधानिक अनुमति अनिवार्य होती है।
सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या इस निर्माण से पहले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अथवा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय से कोई लिखित अनुमति ली गई थी? सूत्रों के अनुसार, अब तक ऐसी किसी भी वैध स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।
स्थानीय नागरिकों का दावा है कि बिना ‘एक्सेस परमिशन’ और बिना बिल्डिंग परमिट के हाईवे की नाली को तोड़कर व्यावसायिक निर्माण करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की श्रेणी में भी आता है। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
नगरपालिका परिषद और राजस्व विभाग की चुप्पी को लेकर भी लोगों में भारी नाराजगी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या रसूखदार जमीन मालिकों के लिए नियम अलग हैं? आम नागरिक यदि घर के बाहर मामूली छज्जा भी निकाल लेता है तो उसे तत्काल नोटिस थमा दिया जाता है, लेकिन यहां नेशनल हाईवे की संरचना को नुकसान पहुंचाने के बाद भी अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले मानसून में इस प्रमुख मार्ग पर जलभराव और यातायात बाधित होने की पूरी संभावना है। इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है। नागरिकों ने आशंका जताई है कि नाली तोड़ने से सड़क की नींव कमजोर हो सकती है, जिससे भविष्य में सड़क धंसने जैसी गंभीर स्थिति भी बन सकती है।
शहर में यह चर्चा भी आम है कि यह पूरा निर्माण रसूख के दम पर कराया जा रहा है और इसी कारण संबंधित विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। लोगों का कहना है कि यदि यही कार्य किसी सामान्य व्यक्ति द्वारा किया गया होता, तो अब तक प्रशासन बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंच चुका होता।
जनता ने जिला प्रशासन, नगर पालिका परिषद और राजस्व विभाग से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कराई जाए, दोषियों पर वैधानिक कार्रवाई की जाए तथा हाईवे की क्षतिग्रस्त नाली को पूर्व स्थिति में बहाल कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना या जलभराव जैसी समस्या से शहर को बचाया जा सके।