UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l धमतरी जिले के वनांचल नगरी क्षेत्र में स्थित मांदागिरी पर्वत धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का महत्वपूर्ण केंद्र है। मेचका गांव के समीप मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख स्थल मानी जाती है। नगरी से लगभग 27 किलोमीटर पूर्व स्थित यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के साथ प्रकृति और साहसिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण संभावनाएं रखता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मुचुकुंद महाराज इक्ष्वाकु वंश के प्रतापी राजा मांधाता के पुत्र थे। उन्होंने देवताओं की सहायता के लिए असुरों के विरुद्ध लंबे समय तक युद्ध किया था। युद्ध के बाद विश्राम के लिए उन्हें देवताओं से वरदान प्राप्त हुआ। मुचुकुंद ऋषि से जुड़ी पौराणिक कथाएं उनकी तपस्या और आध्यात्मिक शक्ति का उल्लेख करती हैं। सिहावा-नगरी का क्षेत्र प्राचीन समय से ही ऋषि-मुनियों की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध रहा है और सप्तऋषियों की तपस्थली से जुड़ी मान्यताएं इसकी आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करती हैं।
मांदागिरी पर्वत पर स्थित आश्रम के आसपास प्राकृतिक वातावरण आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां तालाब, प्राचीन मूर्तियां तथा माता सीता सहित विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं मौजूद हैं। स्थानीय वनवासी समुदाय के साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भी यहां पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करते हैं। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां ट्रेकिंग की संभावना भी मौजूद है। पर्वत से आसपास के वनांचल और सोंढूर जलाशय का सुंदर दृश्य दिखाई देता है, जो प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि मांदागिरी में मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली धमतरी की समृद्ध आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र का समग्र विकास किया जा सकता है। उन्होंने जल्द ही टीम के साथ मांदागिरी का भ्रमण कर स्थल की वर्तमान स्थिति और आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लेने की बात कही। इस दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए पहुंच मार्ग, स्वच्छता, पेयजल, सुरक्षा तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास की संभावनाओं का परीक्षण किया जाएगा।
मांदागिरी पर्वत पर ट्रेकिंग के साथ सोंढूर डेम की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद भी लिया जा सकता है। यदि यहां आवश्यक पर्यटन सुविधाओं का सुव्यवस्थित विकास किया जाता है, तो यह स्थल धार्मिक पर्यटन के साथ प्रकृति एवं ट्रेकिंग आधारित पर्यटन के लिए नई पहचान बना सकता है। इससे स्थानीय समुदाय की सहभागिता बढ़ने और वनांचल क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर पैदा होने की संभावना भी है।