CJP प्रदर्शन में नाबालिगों की भागीदारी पर NHRC सख्त, मुंबई पुलिस समेत चार को नोटिस

मुंबई में 2 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए CJP प्रदर्शन में नाबालिगों की कथित भागीदारी और सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें-वीडियो प्रसारित किए जाने के मामले में NHRC ने संज्ञान लिया है। आयोग ने मुंबई पुलिस, MeitY, X Corp. के ग्रिवांस ऑफिसर और महाराष्ट्र महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी कर जांच और एक सप्ताह में Action Taken Report मांगी है।

Oct 4, 2026 - 15:37
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CJP प्रदर्शन में नाबालिगों की भागीदारी पर NHRC सख्त, मुंबई पुलिस समेत चार को नोटिस

UNITED NEWS OF ASIA. मुंबई में 2 अक्टूबर को चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों की कथित भागीदारी और उनकी तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए मुंबई पुलिस समेत चार संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।

NHRC ने मुंबई पुलिस, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत में X Corp. के ग्रिवांस ऑफिसर तथा महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग से मामले में कार्रवाई और जांच से संबंधित जानकारी मांगी है। आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर Action Taken Report (ATR) प्रस्तुत करने को कहा है।
मामले पर NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने विचार किया। शिकायत सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के हेड ऑफ इंटरवेंशन सतीश वैद की ओर से दर्ज कराई गई है। शिकायत में सोशल मीडिया पर सामने आए कथित फोटो और वीडियो का हवाला दिया गया है।

शिकायत के अनुसार, कथित प्रदर्शन के दौरान एक बच्चे को भीड़ के ऊपर उठाए जाने, नारेबाजी और लोगों द्वारा वीडियो रिकॉर्ड किए जाने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन से पहले कुछ ग्रुप और चैट में नाबालिगों की भागीदारी को लेकर चर्चा हुई थी। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता और उनकी पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

NHRC ने मुंबई पुलिस को पूरे मामले की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस को प्रदर्शन से संबंधित फोटो, वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच करने को कहा गया है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि जांच के दौरान किसी संज्ञेय अपराध के होने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार FIR दर्ज की जाए।
पुलिस को यह पता लगाने के लिए भी कहा गया है कि बच्चों को कथित प्रदर्शन में किन परिस्थितियों में शामिल किया गया। इसके साथ ही आयोजकों, समन्वयकों, बच्चों के साथ मौजूद वयस्कों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

आयोग ने कथित ग्रुप और चैट से संबंधित डिजिटल जानकारी को सुरक्षित रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर उसकी फॉरेंसिक जांच कराने को भी कहा है। इसके अलावा बच्चों की नाबालिग स्थिति का कहीं अनुचित तरीके से इस्तेमाल तो नहीं किया गया, इसकी भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।

NHRC ने Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 की धारा 75 और 83(2) समेत अन्य लागू कानूनी प्रावधानों की संभावित प्रासंगिकता की जांच करने को कहा है। आयोग का फोकस इस बात पर भी है कि प्रदर्शन में शामिल बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।

महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को बच्चों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित बच्चों को सक्षम बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश करने और उन्हें काउंसलिंग, मनोसामाजिक सहायता, देखभाल तथा पुनर्वास जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने को कहा गया है।

सोशल मीडिया पर नाबालिग बच्चों की तस्वीरों और वीडियो के प्रसार को लेकर भी NHRC ने चिंता जताई है। आयोग ने X Corp. और MeitY से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा बाल सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े लागू नियमों के अनुपालन की जानकारी मांगी है।

फिलहाल मामले में NHRC की कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।