नगरी अंचल के पहले पुलिस अधीक्षक बने माहेश्वर नाग, संघर्ष और मेहनत से हासिल की बड़ी सफलता
धमतरी जिले के नगरी अंचल के निवासी माहेश्वर नाग पुलिस विभाग में पदोन्नत होकर पुलिस अधीक्षक (एसपी) बने हैं। वे नगरी क्षेत्र से इस पद तक पहुंचने वाले पहले अधिकारी हैं। जवाहर नवोदय विद्यालय से शुरू हुआ उनका सफर सीआईएसएफ, डीएसपी और अब एसपी बनने तक संघर्ष, मेहनत और समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l धमतरी जिले के नगरी अंचल के लिए यह गर्व और गौरव का अवसर है। ग्राम नगरी के निवासी माहेश्वर नाग पुलिस विभाग में पदोन्नत होकर पुलिस अधीक्षक (एसपी) बने हैं। वे नगरी अंचल से इस प्रतिष्ठित पद तक पहुंचने वाले पहले अधिकारी हैं। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है और युवाओं के बीच उनकी सफलता प्रेरणा का विषय बनी हुई है।
साल 1979 में ग्राम नगरी में जन्मे माहेश्वर नाग ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही प्रतिभा का परिचय दे दिया था। कक्षा पांचवीं में उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय, माना कैंप में हुआ, जिसने उनके शैक्षणिक जीवन को नई दिशा दी। इसके बाद उन्होंने निरंतर मेहनत और लगन के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने छत्तीसगढ़ कॉलेज, रायपुर से बीएससी की डिग्री प्राप्त की तथा एंथ्रोपोलॉजी विषय में एमएससी की पढ़ाई पूरी की।
महज 23 वर्ष की आयु में उन्होंने कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में सब-इंस्पेक्टर के पद पर चयन प्राप्त किया। हैदराबाद और उदयपुर में सेवा के दौरान उन्होंने अपने कार्यकुशलता और अनुशासन का परिचय दिया। इसी दौरान उन्होंने वर्ष 2007 में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पद पर चयन हासिल किया।
पुलिस सेवा के दौरान माहेश्वर नाग ने अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने एसडीओपी अंबागढ़ चौकी, सीएसपी दल्लीराजहरा, एसडीओपी भानुप्रतापपुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कोंडागांव, कवर्धा, एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर, रायगढ़, सारंगढ़ और बस्तर जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर अपनी सेवाएं दीं। प्रत्येक पद पर उन्होंने अपने कार्यों से प्रशासनिक दक्षता और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। बस्तर में पदस्थापना के दौरान उन्हें पदोन्नति मिली और वर्तमान में वे माना पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उनकी इस सफलता पर परिवार सहित पूरे नगरी अंचल में उत्साह का माहौल है। उनके पिता अमृत लाल नाग और माता तुलसी देवी नाग ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं बड़े भाई रुद्रप्रताप नाग ने उनकी उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए इसे पूरे क्षेत्र के लिए सम्मान की बात बताया है।
प्रशासनिक जिम्मेदारियों के अलावा माहेश्वर नाग बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। उन्हें फुटबॉल खेलना, नियमित व्यायाम करना, गायन और फिल्मों की कहानी लेखन का विशेष शौक है। यातायात जागरूकता पर उनके द्वारा बनाई गई एक लघु फिल्म को राष्ट्रीय शॉर्ट फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है, जो उनकी रचनात्मक सोच और सामाजिक सरोकारों को भी दर्शाता है।
माहेश्वर नाग की सफलता यह साबित करती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प, मेहनत और निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। नगरी अंचल से पुलिस अधीक्षक बनने वाले पहले अधिकारी के रूप में उनकी उपलब्धि न केवल क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के युवाओं के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है।