महासमुंद कांग्रेस भवन में तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और बिसाहूदास महंत को श्रद्धांजलि, महापुरुषों के आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प

महासमुंद के कांग्रेस भवन में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व मंत्री बिसाहूदास महंत की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने महापुरुषों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया तथा उनके योगदान को याद किया।

Jul 24, 2026 - 14:14
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महासमुंद कांग्रेस भवन में तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और बिसाहूदास महंत को श्रद्धांजलि, महापुरुषों के आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प

UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश और जिला कांग्रेस कमेटी के मार्गदर्शन में शहर कांग्रेस कमेटी महासमुंद द्वारा स्थानीय कांग्रेस भवन में एक गरिमामय श्रद्धांजलि एवं स्मरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व मंत्री बिसाहूदास महंत की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर कांग्रेस पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने उपस्थित होकर राष्ट्र निर्माण में इन महान विभूतियों के योगदान को याद किया तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गुरमीत चावला ने की। कार्यक्रम की शुरुआत महापुरुषों के तैलचित्रों पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर राष्ट्र के लिए उनके योगदान को नमन किया और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में गुरमीत चावला ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन महान नेताओं में शामिल थे जिन्होंने "स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा" का ऐतिहासिक उद्घोष देकर देशभर में स्वतंत्रता की अलख जगाई। उनके विचारों ने लाखों भारतीयों को अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रेरित किया और राष्ट्रीय चेतना को नई दिशा प्रदान की।

उन्होंने कहा कि अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद का जीवन साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण है। आज़ाद ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए समर्पित किया और अंतिम सांस तक अंग्रेजी हुकूमत के सामने झुकने के बजाय वीरगति को स्वीकार किया। उनका बलिदान आज भी देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण का संदेश देता है।

कार्यक्रम में बिसाहूदास महंत के योगदान को भी विशेष रूप से याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्व मंत्री के रूप में उन्होंने छत्तीसगढ़ के सामाजिक, राजनीतिक और विकासात्मक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका सार्वजनिक जीवन सादगी, जनसेवा और सामाजिक समर्पण का उदाहरण रहा। उन्होंने हमेशा समाज के कमजोर वर्गों के हितों को प्राथमिकता दी और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर कार्य किया।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए अन्य वक्ताओं ने भी तीनों महान विभूतियों के जीवन, संघर्ष, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि इन महापुरुषों ने अपने कर्म, विचार और त्याग से भारतीय समाज को नई दिशा दी। उनके आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने स्वतंत्रता आंदोलन के समय थे।

वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की आवश्यकता है। ऐसे समय में लोकमान्य तिलक, चंद्रशेखर आज़ाद और बिसाहूदास महंत के विचार समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं। उनके आदर्शों को अपनाकर ही राष्ट्र और समाज के विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।

सभा में उपस्थित कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलकर लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय एकता और जनसेवा की भावना को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां देश के गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा ले सकें।

कार्यक्रम के दौरान महापुरुषों के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख किया गया और युवाओं से आह्वान किया गया कि वे राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, सामाजिक सेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और जनहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी ही इन महान विभूतियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस गरिमामय कार्यक्रम में डॉ. रश्मि चंद्राकर, दाऊलाल चंद्राकर, संजय शर्मा, मनोजकांत साहू, खिलावन बघेल, लक्ष्मी देवांगन, सोमेश दवे, अमन चंद्राकर, विरेन्द्र चंद्राकर, राजेश नेताम, मनोहर ठाकुर, मोती साहू, गोपी तारक, लक्ष्मी सोनी, टोमन सिंह कागजी, कुणाल चंद्राकर, कमल प्रजापति, अनीश राजवानी, लहरी ठाकुर, अनुराग चंद्राकर, रवि साहू, अब्दुल जावेद, मोइन हूसैन, तुलसी देवदास, भानु सोनी सहित अनेक कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंत में सभी उपस्थितजनों ने एक स्वर में यह संकल्प दोहराया कि वे राष्ट्रभक्ति, लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और जनसेवा की भावना को अपने जीवन में अपनाते हुए महापुरुषों के आदर्शों का अनुसरण करेंगे तथा उनके विचारों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे।