राकेश उसेंडी ने अपने क्षेत्र के विभिन्न शासकीय विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर भवन क्षतिग्रस्त और मरम्मत योग्य पाए गए। वहीं कुछ स्थानों पर आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए स्थायी भवन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति सामने आई। इसके बाद उन्होंने इन समस्याओं के समाधान के लिए कलेक्टर को पत्र सौंपकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
राकेश उसेंडी ने 7 सितंबर 2026 को पत्र क्रमांक 46 के माध्यम से कलेक्टर को विस्तृत आवेदन दिया। उन्होंने मांग की है कि जिन स्कूल और आंगनबाड़ी भवनों में मरम्मत की जरूरत है, वहां प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य कराया जाए। जिन स्थानों पर भवन उपलब्ध नहीं हैं, वहां नवीन भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की जाए। इसके लिए उन्होंने DMF मद से राशि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है।
उन्होंने कुल 10 निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की सूची कलेक्टर को सौंपी है, जिसकी अनुमानित कुल लागत 150 लाख रुपये यानी 1.50 करोड़ रुपये बताई गई है।
प्रस्ताव में मढोनार पंचायत के अंतर्गत कावानार में आंगनबाड़ी भवन, झोरी में आंगनबाड़ी भवन, कावानार में प्राथमिक शाला, तोयामेटा में आंगनबाड़ी और प्राथमिक शाला भवन निर्माण शामिल हैं। इन कार्यों के माध्यम से संबंधित क्षेत्रों में बच्चों के लिए स्थायी शैक्षणिक और बाल विकास सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
छोटेडोंगर पंचायत के अंतर्गत तोयामेटा में पूर्व माध्यमिक शाला भवन, स्वामी आत्मानंद शासकीय माध्यमिक विद्यालय छोटेडोंगर में शौचालय मरम्मत तथा मुण्डाटिकरा में प्राथमिक शाला भवन के कार्य प्रस्तावित किए गए हैं।
इसी तरह रायनार और फरसगांव क्षेत्र के लिए भी मरम्मत एवं निर्माण कार्यों का प्रस्ताव दिया गया है। रायनार प्राथमिक शाला की क्षतिग्रस्त छत की मरम्मत और शौचालय निर्माण तथा मुण्डपाल माध्यमिक शाला में दीवार सहित अन्य आवश्यक मरम्मत कार्य शामिल हैं।
राकेश उसेंडी ने कहा कि क्षेत्र के बच्चों को झोपड़ी या जर्जर भवनों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य और बेहतर शिक्षा के लिए स्थायी, सुरक्षित और सुविधायुक्त भवन उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कलेक्टर से संबंधित विभागों को जल्द निर्देश जारी कर प्रस्तावित कार्यों पर कार्रवाई करने का आग्रह किया है। अब प्रस्तावित 10 कार्यों को लेकर प्रशासन की ओर से स्वीकृति और आगे की प्रक्रिया पर क्षेत्र के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की नजर है।
स्थायी स्कूल और आंगनबाड़ी भवन उपलब्ध होने से बच्चों को बेहतर वातावरण में शिक्षा और प्रारंभिक बाल विकास सेवाएं मिलने की उम्मीद है। साथ ही जर्जर भवनों की मरम्मत होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।