गरियाबंद में पेंशनभोगियों को साइबर ठगी से बचाव की दी जानकारी, 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत की अपील

गरियाबंद पुलिस ने छत्तीसगढ़ पुलिस के साइबर जागृति अभियान के तहत पेंशनभोगियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। लघुफिल्म, पीपीटी और केस स्टडी के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट, फर्जी बैंक कॉल, ओटीपी ठगी और संदिग्ध लिंक से बचने के उपाय बताए गए। ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की गई।

Sep 7, 2026 - 18:04
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गरियाबंद में पेंशनभोगियों को साइबर ठगी से बचाव की दी जानकारी, 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत की अपील

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा पूरे प्रदेश में चलाए जा रहे साइबर जागृति अभियान के तहत गरियाबंद पुलिस ने पेंशनभोगियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में जिले के बड़ी संख्या में पेंशनर्स को बढ़ते साइबर अपराध, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और इससे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। कार्यशाला में पुलिस टीम के साथ बैंक के अधिकारी भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक गरियाबंद वेदव्रत सिरमौर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कर्ण कुमार उइके, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस गरियाबंद निषा सिन्हा और बैंक अधिकारियों ने पेंशनभोगियों को साइबर अपराध से जुड़े विभिन्न मामलों की जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि वरिष्ठ नागरिक और सेवानिवृत्त कर्मचारी साइबर अपराधियों के निशाने पर आ सकते हैं। जीवनभर की जमा पूंजी, पेंशन और अन्य वित्तीय बचत के कारण ठग अलग-अलग तरीकों से उन्हें निशाना बनाते हैं। डिजिटल अरेस्ट, फर्जी बैंक अधिकारी बनकर फोन करना और जीवन प्रमाण पत्र अपडेट करने के नाम पर जानकारी हासिल करना साइबर ठगी के प्रमुख तरीकों में शामिल हैं।

कार्यशाला में साइबर सेल की टीम ने प्रोजेक्टर के माध्यम से लघुफिल्म, पीपीटी और वास्तविक घटनाओं पर आधारित केस स्टडी प्रस्तुत की। इसके जरिए प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाता नंबर, एटीएम पिन, यूपीआई पिन या मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी साझा नहीं करना चाहिए। बैंक या अन्य अधिकृत संस्थाएं फोन पर इस तरह की गोपनीय जानकारी मांगने से संबंधित सावधानी बरतने की सलाह दी गई।

पेंशनभोगियों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी से भी सावधान किया गया। पुलिस के नाम, सीबीआई या ईडी जैसी एजेंसियों का नाम लेकर वीडियो कॉल के माध्यम से डराने या पैसों की मांग करने वाले लोगों के झांसे में नहीं आने की अपील की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी संदिग्ध कॉल पर घबराने के बजाय संबंधित विभाग से सीधे संपर्क करना चाहिए।

इसके अलावा व्हाट्सएप, एसएमएस या अन्य माध्यमों से प्राप्त अनजान और संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने तथा किसी व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में अनजान ऐप डाउनलोड नहीं करने की सलाह दी गई। पेंशन या लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने के नाम पर आने वाले फर्जी कॉल से भी सतर्क रहने को कहा गया। ऐसी स्थिति में संबंधित बैंक शाखा या ट्रेजरी कार्यालय से सीधे संपर्क करने की सलाह दी गई।

कार्यक्रम में उपस्थित कुछ लोगों ने अपने साथ हुई ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के अनुभव भी साझा किए। इससे अन्य पेंशनभोगियों को साइबर अपराध के तरीकों को समझने और सतर्क रहने में मदद मिली।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने अपील की कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो बिना घबराए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती समय में शिकायत करने से ठगी की रकम को संबंधित खातों में होल्ड कराने की कार्रवाई में मदद मिल सकती है। साथ ही नजदीकी थाने या साइबर सेल से संपर्क करने की भी सलाह दी गई।

कार्यक्रम के अंत में पुलिस ने पेंशनर्स से साइबर जागरूकता संदेश को अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की। वरिष्ठ नागरिकों ने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का आग्रह किया।