मेहनत, हुनर और बिहान के सहयोग से रानू कैवर्त बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल, सालाना आय 2 से 3 लाख रुपये तक

गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड की रानू कैवर्त ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़कर विभिन्न आजीविका गतिविधियों को अपनाया। सिलाई, कपड़ों की दुकान, किराना स्टोर, बटेर पालन, देशी मुर्गी पालन और हैचरी जैसे कार्यों से उनकी वार्षिक आय 2 से 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है। रानू अब महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल बन रही हैं।

Sep 7, 2026 - 18:38
Sep 7, 2026 - 18:48
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मेहनत, हुनर और बिहान के सहयोग से रानू कैवर्त बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल, सालाना आय 2 से 3 लाख रुपये तक

UNITED NEWS OF ASIA. गौरेला पेंड्रा मरवाही l 7 सितंबर 2026। ग्राम पंचायत अंडी, विकासखंड मरवाही की रानू कैवर्त मेहनत, हुनर और सही मार्गदर्शन के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़ने के बाद उन्होंने अपनी रुचि और कौशल को अलग-अलग आजीविका गतिविधियों से जोड़ा। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और अब उनकी वार्षिक आय लगभग 2 से 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

रानू कैवर्त शिव गुरु महिला स्व-सहायता समूह में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। बिहान समूह से मिले सहयोग, आर्थिक सहायता और मार्गदर्शन का उपयोग करते हुए उन्होंने एक ही व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय आय के कई साधन विकसित किए। उनके समूह द्वारा सिलाई कार्य, कपड़ों की दुकान और किराना स्टोर संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही बटेर पालन, देशी मुर्गी पालन और हैचरी जैसी गतिविधियों को भी आजीविका से जोड़ा गया है।

इन विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से रानू और उनके समूह को आय के अतिरिक्त स्रोत मिले हैं। ग्रामीण क्षेत्र में सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने उपलब्ध अवसरों का बेहतर उपयोग करते हुए अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया। उनकी सफलता यह बताती है कि यदि महिलाओं को संगठित होकर काम करने का अवसर, आवश्यक संसाधन और उचित मार्गदर्शन मिले तो वे परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे सकती हैं।

रानू के अनुसार, स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी आजीविका को आगे बढ़ाने के लिए नया अवसर मिला। बिहान से प्राप्त सहयोग का उपयोग उन्होंने अलग-अलग व्यवसायों को शुरू करने और विस्तार देने में किया। सिलाई से लेकर किराना दुकान तथा पशु-पक्षी आधारित गतिविधियों तक कई कार्यों को जोड़कर उन्होंने आय के स्थायी साधन विकसित करने का प्रयास किया।

रानू कैवर्त को महतारी वंदन योजना के तहत प्रत्येक माह मिलने वाली आर्थिक सहायता भी प्राप्त होती है। उनके अनुसार, नियमित आर्थिक सहयोग से घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलती है और आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।

रानू की उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण बन रही है। उनका सफर बताता है कि समूह से जुड़कर योजनाओं का लाभ उठाने और मेहनत के साथ नए अवसरों को अपनाने से महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। अपनी सफलता के लिए रानू कैवर्त ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।