कोरिया-एमसीबी के वानांचल में अंधेरे का संकट, सोलर प्लांटों की बैटरी और इन्वर्टर जवाब, पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने की नई व्यवस्था की मांग

कोरिया और एमसीबी जिले के सोनहत विकासखंड के कई वानांचल गांवों में सोलर प्लांट बंद होने से ग्रामीण अंधेरे में हैं। खराब बैटरियों और इन्वर्टरों के कारण बिजली आपूर्ति ठप है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र मरम्मत और नई बैटरी लगाने की मांग की है। पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि सरकार वानांचलों के गरीब आदिवासियों की उपेक्षा कर रही है और जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा।

Nov 4, 2025 - 13:55
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कोरिया-एमसीबी के वानांचल में अंधेरे का संकट, सोलर प्लांटों की बैटरी और इन्वर्टर जवाब, पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने की नई व्यवस्था की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, कोरिया/एमसीबी। एक ओर जहां प्रदेश भर में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने का जश्न रजत जयंती महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कोरिया और एमसीबी जिले के कई वानांचल गांवों में अंधेरे का संकट गहराता जा रहा है। सोनहत विकासखंड के दर्जनभर गांवों में सौर ऊर्जा से संचालित बिजली व्यवस्था ठप पड़ी है।

 

ग्रामीणों के अनुसार, इन क्षेत्रों में लगाए गए 22 सोलर प्लांट लंबे समय से खराब पड़े हैं। कई जगहों पर बैटरी और इन्वर्टर पूरी तरह निष्क्रिय हो चुके हैं। आउट ऑफ वारंटी हो जाने के बाद अब इनकी मरम्मत भी संभव नहीं है। गांवों में कभी-कभी एक-दो घंटे बिजली मिलती है, जबकि कई स्थानों पर पूरे 24 घंटे अंधेरा रहता है।

ग्राम निग्नोहर, देवतीडांड़, पत्थरगवां, नटवाही, चुलादर और तुर्रीपानी सहित कई गांवों के प्लांट पूरी तरह बंद हैं। ग्रामीणों ने बताया कि क्रेडा विभाग के तकनीशियन कई बार सर्वे करने पहुंचे, परंतु खराब बैटरियों के कारण प्लांट अब चालू नहीं हो पा रहे। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि जब तक नई बैटरियां और इन्वर्टर नहीं लगाए जाते, तब तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकती।

पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “राज्य उत्सव की चकाचौंध के बीच वानांचल गांवों के लोग अंधेरे में जी रहे हैं। सरकार को गरीब आदिवासियों की कोई चिंता नहीं है। यदि बजट की समस्या है तो डीएमएफ फंड से नई बैटरी और इन्वर्टर की खरीदी की जाए।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निराकरण नहीं किया गया, तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस समस्या पर चिंता जताई है। जनपद पंचायत सोनहत की अध्यक्ष आशा देवी सोनपाकर ने कहा कि वे शीघ्र ही अधिकारियों से चर्चा कर समाधान करवाएंगी। वहीं जयचंद सोनपाकर और प्रेम सागर तिवारी ने भी कहा कि यदि विभाग कार्रवाई नहीं करता, तो जनहित में आंदोलन किया जाएगा।

ग्रामीणों की पीड़ा यह है कि जिन सौर ऊर्जा परियोजनाओं ने कभी उनके गांवों को रौशन किया था, आज वही प्लांट दम तोड़ चुके हैं। अब वे फिर से लालटेन के सहारे जीवन यापन को मजबूर हैं, और प्रशासन से बस एक ही मांग कर रहे हैं — “हमें फिर से रौशनी चाहिए।”