कवर्धा वनमंडल में वन स्थायी समिति की बैठक संपन्न, रोजगार और वन संरक्षण पर जोर

कवर्धा वनमंडल में वन स्थायी समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें संयुक्त वन प्रबंधन, चक्रीय निधि, रोजगार योजनाओं और वन संरक्षण पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में जनजागरूकता बढ़ाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।

Apr 3, 2026 - 18:43
 0  3
कवर्धा वनमंडल में वन स्थायी समिति की बैठक संपन्न, रोजगार और वन संरक्षण पर जोर

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा छत्तीसगढ़ के कवर्धा वनमंडल में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा वन स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक 02 अप्रैल 2026 को वनमंडल कार्यालय के सभाकक्ष में संपन्न हुई, जिसमें वन प्रबंधन, रोजगार योजनाओं और संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में वन स्थायी समिति के सभापति राजकुमार मेरावी, जिला पंचायत सदस्य लोकचंद साहू, श्री रूप सिंह धुर्वे, श्री महेंद्र धृतलहरे, श्रीमती राजेश्वरी धृतलहरे, श्रीमती ललिता धुर्वे सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। वहीं वन विभाग की ओर से वनमंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल, उप वनमंडलाधिकारी अभिनव केशरवानी, सुयशधर दीवान, शिवेन्द्र भगत तथा भोरमदेव अभ्यारण्य की अधीक्षक अनिता साहू सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के कार्यों, वर्ष 2025-26 के विकास कार्यों की समीक्षा, राजसात वाहनों की स्थिति और चक्रीय निधि के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इस दौरान श्री कीर्तिवर्धन द्वारा पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई।

प्रस्तुति में बताया गया कि संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के तहत उपलब्ध राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा आय और रोजगार सृजन गतिविधियों में खर्च किया जाता है। इसमें मछली पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, बांस शिल्प और ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण जैसे कार्य शामिल हैं। इसके अलावा 20 प्रतिशत राशि सिंचाई विकास कार्यों जैसे स्टॉप डैम मरम्मत, नहर और नाली सफाई तथा तालाब निर्माण में उपयोग की जाती है।

अधोसंरचना विकास के लिए 10 प्रतिशत राशि निर्धारित की गई है, जिसमें पुलिया निर्माण, सामुदायिक भवन, बाउंड्रीवाल और सोलर लाइट जैसे कार्य शामिल हैं। वहीं शेष 10 प्रतिशत राशि पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए खर्च की जाती है, जिसमें बोर खनन, हैंडपंप और नल-जल योजना शामिल हैं।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि वर्ष 2025-26 के दौरान इन योजनाओं के माध्यम से विभिन्न उप वनमंडलों में रोजगार, सिंचाई और आधारभूत संरचना से जुड़े कई कार्य सफलतापूर्वक किए गए हैं। इसके अलावा कवर्धा वनमंडल के अंतर्गत लगभग 8 राजसात वाहन उपलब्ध हैं, जिनके नियमानुसार निस्तारण की प्रक्रिया जारी है।

चक्रीय निधि योजना के तहत हितग्राहियों को वाहन ऋण, समूह ऋण, बकरी पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए ऋण प्रदान किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत 4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर 5 वर्षों की अवधि में ईएमआई के माध्यम से ऋण चुकाने की सुविधा दी जाती है।

वनमंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों से इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता बढ़ाने का अनुरोध किया, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

वहीं समिति के सभापति राजकुमार मेरावी और सदस्य लोकचंद साहू ने ऋण की समय पर वसूली सुनिश्चित करने के लिए ऋणधारियों को नोटिस जारी करने और बकाया राशि शीघ्र जमा कराने का सुझाव दिया। इससे अन्य जरूरतमंद लोगों को भी इस योजना का लाभ मिल सकेगा।

बैठक में सरोधा जलाशय क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने और अतिक्रमणकारियों को हटाने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही वन क्षेत्रों को आग से सुरक्षित रखने के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास करने पर सहमति बनी।

इसके अलावा “किसान वृक्ष मित्र योजना” के तहत अधिक से अधिक पौधारोपण करने और वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों से पशु चराई के लिए जंगल में प्रवेश न करने की अपील भी की गई।

इस प्रकार यह बैठक वन संरक्षण, रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास के समन्वित प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुई।