राहुल सिन्हा ने कहा कि नगर पालिका की लापरवाही के कारण वार्डों की नालियां महीनों से जाम पड़ी हैं, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों को खुद ही फावड़ा और कुदाल लेकर नालियों की सफाई करनी पड़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनता को ही अपने स्तर पर सफाई करनी पड़ रही है, तो नगर पालिका द्वारा वसूले जा रहे टैक्स का औचित्य क्या रह जाता है।
उन्होंने विशेष रूप से नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी के वार्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी सफाई व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है। उनके अनुसार, एक ओर सोशल मीडिया पर विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वास्तविकता में नागरिक गंदगी और दुर्गंध से जूझ रहे हैं।
राहुल सिन्हा ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि “आत्मनिर्भर भारत” का जो मॉडल प्रस्तुत किया जा रहा है, उसमें अब लोगों को अपनी नालियां भी खुद साफ करनी पड़ रही हैं। उन्होंने इसे जनता के साथ धोखा और प्रशासन की गंभीर विफलता बताया।
इस मुद्दे को लेकर उन्होंने प्रशासन को चेतावनी भी दी है कि यदि जल्द ही सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो युवा कांग्रेस सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी। उन्होंने नगर पालिका का घेराव करने की भी बात कही, जिससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है।
स्थानीय नागरिकों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने का खतरा बना हुआ है। खासकर गर्मी के मौसम में गंदगी और जाम नालियां बीमारियों को बढ़ावा दे सकती हैं।
कुल मिलाकर, कवर्धा की सफाई व्यवस्था को लेकर उठे इस विवाद ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वाकई हालात में सुधार होता है या यह मामला राजनीतिक आंदोलन का रूप लेता है।