भोरमदेव में 2 अगस्त से शुरू होगा संभागीय सरस मेला, लखपति दीदियों के उत्पादों के साथ सजेगा संस्कृति का उत्सव

कवर्धा के भोरमदेव मंदिर परिसर में 2 से 6 अगस्त तक संभागीय सरस मेले का आयोजन होगा। मेले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री के साथ लोक संस्कृति, हस्तशिल्प, मिलेट उत्पाद एवं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

Jul 31, 2026 - 16:47
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भोरमदेव में 2 अगस्त से शुरू होगा संभागीय सरस मेला, लखपति दीदियों के उत्पादों के साथ सजेगा संस्कृति का उत्सव

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। सावन के पावन महीने में विश्व प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर परिसर एक बार फिर ग्रामीण संस्कृति, महिला उद्यमिता और स्वदेशी उत्पादों के रंगों से सराबोर होने जा रहा है। भोरमदेव मंदिर के समीप ग्राम चैरा, विकासखंड बोडला में 2 से 6 अगस्त 2026 तक पांच दिवसीय संभागीय सरस मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले में दुर्ग संभाग सहित विभिन्न जिलों की महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की प्रदर्शनी एवं विक्रय किया जाएगा।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों की लखपति दीदियां इस मेले में अपने हस्तनिर्मित और स्वदेशी उत्पादों का प्रदर्शन करेंगी। यहां आने वाले लोगों को मिलेट आधारित पौष्टिक खाद्य सामग्री, घरेलू खाद्य उत्पाद, महुआ, चार, चिरौंजी सहित विभिन्न वनोपज आधारित उत्पाद उपलब्ध होंगे। इसके अलावा हस्तशिल्प, हस्तकरघा उत्पाद, बांस और बेंत से बनी आकर्षक सामग्री, पारंपरिक परिधान, सजावटी वस्तुएं और दैनिक उपयोग की कई उपयोगी सामग्रियां भी खरीदने का अवसर मिलेगा।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि इस मेले का उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों को बाजार उपलब्ध कराना, उनकी आय में वृद्धि करना और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक खरीदारी किसी ग्रामीण परिवार की आय बढ़ाने के साथ महिला उद्यमियों का आत्मविश्वास भी मजबूत करती है और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को साकार करती है।

मेले के दौरान प्रतिदिन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें लोकनृत्य, लोकगीत और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति की आकर्षक प्रस्तुतियां विभिन्न कलाकारों द्वारा दी जाएंगी। सांस्कृतिक आयोजन मेले की रौनक को और बढ़ाएंगे तथा पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेंगे।

संभागीय सरस मेले में कबीरधाम, दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, बेमेतरा, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई सहित दुर्ग संभाग के विभिन्न जिलों और अन्य क्षेत्रों के महिला स्व-सहायता समूह भाग लेंगे। मेले में लगभग 45 से 50 स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री होगी।

आयोजकों ने लोगों से परिवार और मित्रों के साथ मेले में पहुंचकर ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी करने तथा स्थानीय संस्कृति और कला का आनंद लेने की अपील की है। पांच दिवसीय यह आयोजन महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका और छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।