RTE प्रवेश विवाद पर स्कूलों का पक्ष: तकनीकी त्रुटि को बताया अनावश्यक विवाद, आरोपों को किया खारिज

कबीरधाम जिले में RTE प्रवेश विवाद पर गुरुकुल पब्लिक स्कूल और अशोका पब्लिक स्कूल प्रबंधन ने इसे तकनीकी त्रुटि बताया है। प्रबंधन ने आरोपों को भ्रामक बताते हुए पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

Apr 6, 2026 - 18:08
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RTE प्रवेश विवाद पर स्कूलों का पक्ष: तकनीकी त्रुटि को बताया अनावश्यक विवाद, आरोपों को किया खारिज

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा। कबीरधाम जिले में RTE (Right to Education) प्रवेश प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बीच संबंधित स्कूल प्रबंधन ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए इसे एक तकनीकी त्रुटि का मामला बताया है। गुरुकुल पब्लिक स्कूल, महाराजपुर और अशोका पब्लिक स्कूल, मजगांव के प्रबंधन ने आरोपों को भ्रामक और अतिरंजित बताते हुए कहा है कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से विवादित बनाया जा रहा है।

स्कूल प्रबंधन के अनुसार RTE प्रवेश की पूरी प्रक्रिया राज्य शासन के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित होती है। इस प्रक्रिया में हैबिटेशन कोड, लोकेशन और मैपिंग जैसी जानकारियां सिस्टम आधारित होती हैं, जिनमें विद्यालय की सीधी भूमिका सीमित होती है। प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने अपनी ओर से सही और ग्रामीण क्षेत्र के अनुरूप जानकारी ही उपलब्ध कराई थी।

प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि विद्यालयों ने कभी भी स्वयं को शहरी क्षेत्र में प्रदर्शित करने का प्रयास नहीं किया। सभी प्रवेश शासन द्वारा निर्धारित नियमों और समय-सारणी के अनुसार ही किए गए। उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी छात्र का चयन विद्यालय स्तर पर नहीं होता, बल्कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पोर्टल आधारित लॉटरी प्रणाली के माध्यम से होती है।

यदि हैबिटेशन कोड या लोकेशन में कोई असंगति सामने आई है, तो यह संभवतः पोर्टल या सिस्टम मैपिंग से जुड़ी तकनीकी त्रुटि हो सकती है। ऐसे में इसकी जिम्मेदारी केवल विद्यालयों पर डालना उचित नहीं है, बल्कि इसमें संबंधित सत्यापन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

जांच समिति की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रबंधन ने कहा कि रिपोर्ट में “गंभीर त्रुटि” का उल्लेख जरूर किया गया है, लेकिन कहीं भी यह सिद्ध नहीं किया गया कि विद्यालयों ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया। रिपोर्ट में प्रशासनिक स्तर पर सत्यापन की कमी का भी जिक्र है, जो यह दर्शाता है कि यह एक सामूहिक प्रक्रिया की चूक हो सकती है।

राजनीतिक आरोपों को लेकर भी प्रबंधन ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि युवा कांग्रेस द्वारा लगाए गए कमीशन और संरक्षण जैसे आरोप पूरी तरह निराधार और मानहानिकारक हैं। बिना ठोस प्रमाण के इस तरह के आरोप शिक्षा संस्थानों की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।

दोनों स्कूलों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग कर रहे हैं और यदि किसी स्तर पर सुधार की आवश्यकता होगी, तो उसे स्वीकार करते हुए आगे की प्रक्रिया में और अधिक सतर्कता बरती जाएगी।

प्रबंधन ने अभिभावकों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल तथ्यात्मक जानकारी पर विश्वास करें। उन्होंने दोहराया कि यह मामला किसी सुनियोजित धांधली का नहीं, बल्कि तकनीकी त्रुटि का है और वे पूरी पारदर्शिता के साथ जांच और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।