जनपद पंचायत बोडला अंतर्गत राजा नवागांव की जय गंगा मैया स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने होली पर्व को ध्यान में रखते हुए हर्बल गुलाल का निर्माण किया है। इस समूह की कुल 10 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से इस कार्य में संलग्न हैं, जिनके लिए यह आजीविका का अच्छा स्रोत बन रहा है।
महिला समूह द्वारा तैयार किया गया गुलाल लाल, गुलाबी, पीला सहित विभिन्न आकर्षक रंगों में उपलब्ध है। यह गुलाल प्राकृतिक फूलों और पत्तियों से तैयार किया गया है, जिसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक तत्वों का उपयोग नहीं किया गया है। प्राकृतिक खुशबू और आकर्षक पैकेजिंग के साथ यह हर्बल गुलाल बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए कलेक्टर गोपाल वर्मा ने बताया कि प्रत्येक वर्ष होली के अवसर पर जिले के कई महिला समूहों द्वारा हर्बल गुलाल का निर्माण किया जाता है। कलेक्टोरेट परिसर, जनपद पंचायत कार्यालयों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर महिला समूहों द्वारा स्टॉल लगाकर बिक्री की जाती है। उन्होंने बताया कि समूह की दीदियों द्वारा बनाया गया गुलाल पूरी तरह प्राकृतिक होता है और बाजार में उपलब्ध अन्य रंगों की तुलना में अधिक सुरक्षित एवं किफायती है।
कलेक्टर ने यह भी बताया कि हर्बल गुलाल की पैकेजिंग बेहद आकर्षक होती है, जिससे यह उपहार के रूप में भी काफी पसंद किया जा रहा है। गत वर्ष भी जिले में महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हर्बल गुलाल को लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिला था और इससे ग्रामीण महिलाओं की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी।
वहीं सीईओ जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि हर वर्ष अनेक महिला समूह इस मौसमी व्यवसाय से जुड़ते हैं। एक समूह को हर्बल गुलाल निर्माण से औसतन 50 से 60 हजार रुपये तक का लाभ प्राप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि मैदानी स्तर के कर्मचारी समूहों को इस प्रकार के मौसमी व्यवसाय अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं और आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता में भी सहायता प्रदान की जाती है।
हर्बल गुलाल के उपयोग से न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि समाज में सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल होली मनाने का संदेश भी जा रहा है।
हर्बल गुलाल के प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं –
हर्बल गुलाल प्राकृतिक सामग्री जैसे फूल और पत्तियों से तैयार किया जाता है। इसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं होती, जिससे यह त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहता है। यह पर्यावरण अनुकूल होता है और आसानी से पानी से साफ हो जाता है, जिससे पानी की भी बचत होती है। हर्बल गुलाल से एलर्जी की संभावना बेहद कम होती है, क्योंकि इसमें हानिकारक रसायनों का उपयोग नहीं किया जाता। साथ ही इसकी प्राकृतिक खुशबू इसे और भी आकर्षक बनाती है।
इस तरह कबीरधाम जिले की महिलाएं हर्बल गुलाल के माध्यम से होली को सुरक्षित, स्वच्छ और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए ग्रामीण आजीविका के नए अवसर सृजित कर रही हैं।