PMGSY में भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश: नियमों को ताक पर रख गृह जिले में जमे EE पहुंचे रायपुर, ‘जुगलबंदी’ की चर्चा तेज

MCB जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कों के निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच कार्यपालन अभियंता मोतीराम सिंह के रायपुर पहुंचने से हलचल तेज हो गई है। गृह जिले में नियम विरुद्ध पदस्थापना, ठेकेदारों से साठगांठ और जांच से बचने की कोशिश पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Jan 22, 2026 - 18:08
Jan 22, 2026 - 18:15
 0  31
PMGSY में भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश: नियमों को ताक पर रख गृह जिले में जमे EE पहुंचे रायपुर, ‘जुगलबंदी’ की चर्चा तेज

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर,कोरिया | MCB जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत बन रही सड़कों में कथित भ्रष्टाचार का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। सड़कों की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों और जांच की प्रक्रिया के बीच विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) मोतीराम सिंह के रायपुर पहुंचने की खबर ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। चर्चा है कि वे अपने ऊपर मंडरा रही जांच की आंच से बचने और मामले को दबाने के लिए राजधानी में प्रभावशाली अधिकारियों से ‘सेटिंग’ करने पहुंचे हैं।

इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि EE मोतीराम सिंह और संबंधित SDO शैलेश गुप्ता दोनों की पदस्थापना उनके गृह जिले में ही की गई है। जबकि सरकारी स्थानांतरण नीति के अनुसार, क्लास-1 और क्लास-2 अधिकारियों को सामान्यतः उनके गृह जिले में पदस्थ नहीं किया जाता, ताकि वे स्थानीय दबाव, निजी संबंधों और हितों के टकराव से मुक्त रहकर निष्पक्ष कार्य कर सकें।

आरोप है कि गृह जिले में पदस्थ होने का सीधा फायदा ठेकेदारों के साथ साठगांठ बनाने में लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई। वनांचल क्षेत्रों में बनाई जा रही सड़कें पहली बारिश में ही उखड़ने की आशंका जताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, रायपुर से जांच टीम के पहुंचते ही विभाग में हड़कंप मच गया है। अब करोड़ों रुपये के इस कथित खेल को छिपाने के लिए कागजी हेरफेर और रिकॉर्ड में ‘जोड़-तोड़’ किए जाने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि जब अधिकारी स्वयं इसी जिले के हैं और ठेकेदारों से उनके पुराने संबंध हैं, तो निष्पक्ष जांच कैसे संभव होगी।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाकर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। PMGSY जैसी महत्वाकांक्षी योजना ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की रीढ़ मानी जाती है, लेकिन यदि इसी योजना में भ्रष्टाचार हावी हो जाए तो सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर भी सवाल उठना लाजमी है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि कार्रवाई होगी या रायपुर की कथित ‘जुगलबंदी’ एक बार फिर सिस्टम पर भारी पड़ेगी।