जमीन बचाओ जनसभा में महेश पटेल का भाजपा सरकार पर हमला, बोले- भाषण नहीं कागज और सरकारी आदेश चाहिए

चंद्रशेखर आजाद नगर के मंडी ग्राउंड में आयोजित जमीन बचाओ जनसभा में महेश पटेल ने आदिवासी जमीन, खनिज ब्लॉक, पेसा एक्ट, ग्रामसभा, खाद और बिजली की समस्याओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। जनसभा के बाद आदिवासी समाज और ग्रामीणों ने रैली निकालकर एसडीओ कार्यालय में ज्ञापन सौंपा।

Sep 2, 2026 - 19:28
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जमीन बचाओ जनसभा में महेश पटेल का भाजपा सरकार पर हमला, बोले- भाषण नहीं कागज और सरकारी आदेश चाहिए

UNITED NEWS OF ASIA.  मुस्तकीम मुगल, आलीराजपुर l जिले के चंद्रशेखर आजाद नगर के मंडी ग्राउंड में बुधवार को जमीन बचाओ जनसभा का आयोजन किया गया। जनसभा को आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेश पटेल ने संबोधित किया। उन्होंने खनिज ब्लॉक, आदिवासी जमीन, पेसा एक्ट, ग्रामसभा, किसानों को खाद की समस्या और बिजली सहित क्षेत्र की विभिन्न मूलभूत समस्याओं को लेकर प्रदेश सरकार और भाजपा नेताओं पर निशाना साधा। जनसभा के बाद आदिवासी समाज और ग्रामीणों ने रैली निकालकर अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया निरस्त करने, ग्राम पंचायतों पर नीलामी के पक्ष में प्रस्ताव पारित करने के लिए बनाए जा रहे कथित दबाव को रोकने, पेसा एक्ट का पालन सुनिश्चित करने और किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग की गई।

महेश पटेल ने कहा कि यह लड़ाई कांग्रेस या भाजपा की नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपनी जमीन, खेती, संस्कृति, धार्मिक स्थलों और पुरखों की विरासत की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहा है। उनके अनुसार आदिवासी परिवार के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं होती, बल्कि उसकी आजीविका, परंपरा, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी होती है।

खनिज ब्लॉक की प्रक्रिया को लेकर पटेल ने ‘प्री-ऑक्शन’ जैसे तकनीकी शब्दों के जरिए जनता को भ्रमित किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने खेरिया लाइमस्टोन ब्लॉक से जुड़े टेंडर दस्तावेज का उल्लेख करते हुए कहा कि दस्तावेज में ऑनलाइन नीलामी और बोली जमा करने की तारीखों से संबंधित जानकारी दी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रक्रिया केवल प्रारंभिक चरण में थी तो सरकार को इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखनी चाहिए।

पटेल ने आलीराजपुर को अनुसूचित क्षेत्र बताते हुए पेसा कानून के तहत ग्रामसभा की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि प्रभावित बताए जा रहे गांवों में ग्रामसभा आयोजित की गई थी या नहीं। यदि ग्रामसभा हुई है तो उसकी तारीख, प्रस्ताव क्रमांक और प्रमाणित प्रति जनता के सामने रखी जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायतों से खनिज नीलामी के पक्ष में प्रस्ताव पारित कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। पटेल ने कहा कि किसी भी पंचायत या ग्रामसभा पर दबाव बनाकर प्रस्ताव पारित कराने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।

महेश पटेल ने कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान सहित भाजपा नेताओं से भी लिखित जवाब की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में आदिवासी समाज और किसानों की जमीन की सुरक्षा चाहती है तो इसका स्पष्ट सरकारी आदेश जनता के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा नेताओं माधु डावर, दीपक चौहान और विशाल रावत के बयानों को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि यदि वे आदिवासी किसानों के हित में हैं तो सरकार से स्पष्ट एवं लिखित निर्णय कराने के लिए एकजुट होना चाहिए। उन्होंने अनिता चौहान से भी प्रभावित गांवों में जाकर ग्रामीणों की स्थिति समझने और जमीन के मुद्दे पर स्पष्ट रुख रखने की मांग की।

पटेल ने तीन सरपंचों की टीम से जांच कराए जाने की जानकारी का उल्लेख करते हुए जांच को व्यापक और पारदर्शी बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच में प्रभावित ग्रामीणों, ग्रामसभाओं और सभी संबंधित सरकारी दस्तावेजों को शामिल किया जाना चाहिए तथा रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। उन्होंने खनिज विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि खनिज ब्लॉक से संबंधित जानकारी गलत है तो सरकार आधिकारिक रूप से लिखित स्पष्टीकरण जारी करे और यदि प्रक्रिया चल रही है तो उसकी स्थिति भी स्पष्ट करे।

उन्होंने चूना पत्थर, मैंगनीज और ग्रेफाइट से जुड़े ब्लॉकों का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 75 गांवों को लेकर ग्रामीणों में चिंता है। यदि खनन अथवा जमीन से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो इसका प्रभाव बड़े क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि विकास, अस्पताल, स्कूल और रोजगार की बातों के साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि प्रभावित परिवारों के भविष्य की सुरक्षा किस तरह होगी।

जनसभा में किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया। पटेल ने खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मांग की कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त खाद उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने विकासखंडवार खाद का आवंटन, भंडारण और वितरण सुनिश्चित करने की मांग की। बिजली और क्षेत्र की अन्य मूलभूत समस्याओं के समाधान की जरूरत पर भी उन्होंने जोर दिया।

जनसभा के बाद ग्रामीणों ने रैली निकालकर एसडीओ कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। महेश पटेल ने कहा कि जनता को केवल भाषण और बयान नहीं चाहिए, बल्कि सरकारी दस्तावेज, ग्रामसभा के प्रस्ताव, जांच रिपोर्ट और जरूरत पड़ने पर प्रक्रिया रोकने का लिखित आदेश चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार का दावा है कि आदिवासियों की जमीन सुरक्षित रहेगी तो इसका लिखित आदेश जनता के सामने रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि खनिज ब्लॉक, पेसा कानून, ग्रामसभा और किसानों की समस्याओं को लेकर जल्द समाधान नहीं किया गया तो आदिवासी समाज बड़े आंदोलन के लिए बाध्य हो सकता है।