जल संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता – सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज

चिंतामणि महाराज ने सूरजपुर में आयोजित जल संचय जन भागीदारी कार्यशाला में कहा कि गिरते भूजल स्तर के बीच जल संरक्षण और वैज्ञानिक खेती ही भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है।

Feb 26, 2026 - 12:12
 0  10
जल संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता – सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज

UNITED NEWS OF ASIA .विकाश श्रीवास्तव, सूरजपुर | जल संचय जन भागीदारी अभियान के तहत सूरजपुर में स्थित डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऑडिटोरियम तिलसिवां में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चिंतामणि महाराज ने कहा कि पहले लोग नदी, नालों, तालाबों और कुओं जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों से अपनी दैनिक जरूरतें पूरी करते थे, लेकिन अधिकांश जलस्रोतों के सूखने और घटते प्रवाह के कारण अब भूजल पर निर्भरता बढ़ गई है। अधिक बोरिंग और अत्यधिक दोहन से भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। ऐसे में जल संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।

उन्होंने कहा कि जल का सीमित और विवेकपूर्ण उपयोग करने के साथ-साथ उसका सतत संरक्षण भी जरूरी है। शासन द्वारा जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, मृदा परीक्षण और सिंचाई प्रबंधन से जुड़ी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सरपंचों और जनप्रतिनिधियों को इन योजनाओं की पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों तक इनका वास्तविक लाभ पहुंचाया जा सके।

सांसद ने आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि जल उपलब्धता के अनुसार ही फसल चयन किया जाना चाहिए। वैज्ञानिक तरीकों से खेती कर न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य भी दिया जा सकता है। इस अवसर पर “विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन” के उद्देश्यों और गतिविधियों की जानकारी भी दी गई।

कार्यशाला में केंद्रीय भू-जल बोर्ड रायपुर से आए भू-गर्भ वैज्ञानिक बी अभिषेक एवं साईं प्रसन्ना ने जिले से उपस्थित सरपंच, उपसरपंच एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को जल संचय और भूजल प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने “डेटा आधारित जलभृत प्रबंधन योजना अंतर्गत जल प्रबंधन से लाभकारी खेती” विषय पर प्रस्तुति देते हुए बताया कि अनियमित वर्षा, गिरता भूजल स्तर और बढ़ती सिंचाई मांग के कारण पारंपरिक जल प्रबंधन पद्धतियां अब पर्याप्त नहीं रह गई हैं। ऐसे में वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित जल प्रबंधन अपनाकर ही कृषि को लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

कार्यशाला में बड़ी संख्या में सरपंच, उपसरपंच एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे और जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया।