उज्जैन में इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय बैठक, कुंभ में जूना अखाड़ा के साथ शाही स्नान पर बनी सहमति

उज्जैन में इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें देश-विदेश से किन्नर समाज के संत शामिल हुए। बैठक में अखाड़े के विस्तार, संतों की जिम्मेदारियों और आगामी कुंभ पर्वों की तैयारियों पर चर्चा की गई। आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने बताया कि किन्नर अखाड़ा आगामी कुंभ और सिंहस्थ में जूना अखाड़ा के साथ शाही स्नान करेगा।

Mar 14, 2026 - 18:41
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उज्जैन में इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय बैठक, कुंभ में जूना अखाड़ा के साथ शाही स्नान पर बनी सहमति

UNITED NEWS OF ASIA. मध्यप्रदेश के धार्मिक नगर उज्जैन में इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश-विदेश से किन्नर समाज के संत और पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान अखाड़े के संगठनात्मक विस्तार, संतों की जिम्मेदारियों और आगामी कुंभ एवं सिंहस्थ पर्व की तैयारियों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दूसरे दिन संतभोज और पंडित भोज का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संतों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर अखाड़े से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श करते हुए भविष्य की योजनाओं को लेकर निर्णय लिए गए।

इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि किन्नर अखाड़ा समाज में आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराओं को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में हुए एक महत्वपूर्ण अनुबंध के अनुसार किन्नर अखाड़ा आगामी कुंभ और सिंहस्थ पर्व में जूना अखाड़ा के साथ शाही स्नान करेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां जूना अखाड़ा शाही स्नान के लिए जाएगा, वहीं किन्नर अखाड़ा भी उनके साथ शामिल रहेगा। यह व्यवस्था दोनों अखाड़ों के बीच आपसी सहमति से तय की गई थी और इसका उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को मजबूत करना तथा संत समाज के बीच समन्वय बनाए रखना है।

लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने कहा कि किन्नर अखाड़ा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से संगठित हुआ है और समाज के आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों में अपनी महत्वपूर्ण पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि किन्नर समाज भी सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है और अखाड़े के माध्यम से समाज को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।

बैठक में अखाड़े के विस्तार और संतों की जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चा की गई। विभिन्न राज्यों और देशों से आए संतों ने अपने विचार साझा किए और संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के सुझाव दिए।

धार्मिक दृष्टि से उज्जैन को एक महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है और यहां आयोजित इस बैठक को किन्नर अखाड़े के लिए विशेष महत्व का माना जा रहा है। आगामी कुंभ और सिंहस्थ पर्वों की तैयारियों को लेकर भी इस बैठक में रणनीति तैयार की गई, ताकि अखाड़ा पूरी गरिमा और परंपरा के साथ इन आयोजनों में भाग ले सके।

किन्नर अखाड़े के संतों ने कहा कि समाज में समानता, सम्मान और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश देना उनका प्रमुख उद्देश्य है। आने वाले समय में अखाड़ा धार्मिक आयोजनों और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी भूमिका को और अधिक मजबूत करेगा |