हेपेटाइटिस बी की समय पर पहचान और स्क्रीनिंग से बच सकती हैं लाखों जिंदगियां

हेपेटाइटिस बी एक गंभीर लेकिन अक्सर बिना लक्षण वाला संक्रमण है, जो लंबे समय तक पहचान में नहीं आता। विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार के सदस्यों की समय पर स्क्रीनिंग, टीकाकरण और नियमित जांच से लिवर सिरोसिस व लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।

Jul 27, 2026 - 17:04
 0  2
हेपेटाइटिस बी की समय पर पहचान और स्क्रीनिंग से बच सकती हैं लाखों जिंदगियां

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l हेपेटाइटिस बी लिवर को प्रभावित करने वाला एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो अक्सर लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में मौजूद रहता है। यही कारण है कि अधिकांश लोगों को संक्रमण का पता तब चलता है, जब बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, परिवार के सदस्यों की स्क्रीनिंग और टीकाकरण के माध्यम से इस बीमारी से होने वाली गंभीर जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर के गैस्ट्रो एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक जैन के अनुसार, हेपेटाइटिस बी वायरस (HBV) सीधे लिवर को प्रभावित करता है। यदि समय रहते इसका उपचार और निगरानी नहीं की जाए तो यह आगे चलकर लिवर सिरोसिस, लिवर फेल्योर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमान के अनुसार वर्ष 2024 में दुनिया भर में लगभग 24 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी संक्रमण से प्रभावित थे, जबकि लगभग 11 लाख लोगों की मृत्यु लिवर कैंसर और सिरोसिस जैसी जटिलताओं के कारण हुई। भारत में भी करीब 3.7 करोड़ लोग इस संक्रमण से प्रभावित बताए जाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार हेपेटाइटिस बी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह परिवार के भीतर भी अनजाने में फैल सकता है। संक्रमण संक्रमित रक्त या शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है। घर में रेजर, टूथब्रश या रक्त के संपर्क में आने वाली अन्य वस्तुओं का साझा उपयोग संक्रमण का कारण बन सकता है। इसके अलावा संक्रमित मां से प्रसव के दौरान नवजात शिशु में भी वायरस पहुंच सकता है। हालांकि सामान्य सामाजिक संपर्क जैसे साथ बैठना, हाथ मिलाना या गले लगना संक्रमण का कारण नहीं बनता।

डॉ. जैन का कहना है कि यदि परिवार के किसी सदस्य में हेपेटाइटिस बी की पुष्टि होती है, तो उसके निकट संपर्क में रहने वाले सभी लोगों को HBsAg जांच अवश्य करानी चाहिए। इससे संक्रमण की समय रहते पहचान हो सकती है और आवश्यक उपचार या रोकथाम के उपाय तुरंत शुरू किए जा सकते हैं। जिन लोगों में संक्रमण नहीं पाया जाता, लेकिन जोखिम बना रहता है, उनके लिए हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों का समय पर टीकाकरण भविष्य में इस संक्रमण के प्रसार को रोकने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि परिवार अपने बच्चों और अन्य सदस्यों का समय पर टीकाकरण कराते हैं, तो आने वाली पीढ़ियों को लिवर संबंधी गंभीर बीमारियों और कैंसर के खतरे से काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि हेपेटाइटिस बी का समय पर पता चलने पर इसका प्रभावी प्रबंधन संभव है। नियमित स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श, आवश्यक दवाएं और समय-समय पर फॉलो-अप के माध्यम से संक्रमित व्यक्ति भी सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है।

विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे हेपेटाइटिस बी को लेकर जागरूक रहें और इसे छिपाने या डरने की बजाय समय पर जांच कराएं। परिवार के सभी सदस्यों की स्क्रीनिंग, आवश्यक टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण न केवल संक्रमण को फैलने से रोक सकते हैं, बल्कि गंभीर लिवर रोगों से भी सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। समय पर उठाया गया एक छोटा कदम भविष्य में पूरे परिवार के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकता है।