'हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण' अभियान को मिली रफ्तार, कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम
छत्तीसगढ़ में कुपोषण और एनीमिया से लड़ने के लिए "हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण" अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। प्रदेशभर में आंगनबाड़ी केंद्रों, पोषण वाटिकाओं और घरों में मुनगा के पौधे लगाए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर बच्चों, किशोरियों और माताओं के स्वास्थ्य में सुधार किया जा सके।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जनभागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से "हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण" अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करना और बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं तथा धात्री माताओं के बेहतर पोषण को बढ़ावा देना है।
प्रदेशभर में चल रहे इस अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों, पोषण वाटिकाओं और हितग्राहियों के घरों में मुनगा (सहजन) के पौधे लगाए जा रहे हैं। अभियान में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, महिलाओं, बच्चों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और विभागीय अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य मुनगा जैसे पोषक पौधे को प्रत्येक परिवार तक पहुंचाकर कुपोषण और एनीमिया की समस्या को प्रभावी ढंग से कम करना है।
अभियान की शुरुआत सुकमा जिले के सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र लस्केपारा से की गई, जहां महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बच्चों के साथ मुनगा और पपीता के पौधे लगाए। इस दौरान उन्होंने अभिभावकों और बच्चों को स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के महत्व, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जानकारी दी। साथ ही सभी परिवारों से अपने घर और आंगन में मुनगा का पौधा लगाने की अपील की।
बेमेतरा जिले में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत "मुनगा पौधारोपण विथ सेल्फी अभियान" भी आयोजित किया गया। इस पहल के अंतर्गत गंभीर कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं और एनीमिया से प्रभावित महिलाओं के घरों में मुनगा के पौधे लगाए गए। अभियान के माध्यम से लोगों को पौधों के संरक्षण, नियमित देखभाल और दैनिक भोजन में मुनगा के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।
इसी तरह बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से पौधारोपण किया गया। इस दौरान लोगों को बताया गया कि मुनगा की पत्तियां, फलियां और फूल आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-ए और विटामिन-सी जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इसका नियमित सेवन बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया की रोकथाम में भी सहायक माना जाता है।
महिला एवं बाल विकास विभाग का मानना है कि कुपोषण के खिलाफ प्रभावी लड़ाई केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनसहभागिता से ही संभव है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर समाज को स्वस्थ बनाया जा सकता है। इसी उद्देश्य के साथ प्रदेशभर में चल रहा "हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण" अभियान लगातार विस्तार पा रहा है और कुपोषण मुक्त, एनीमिया मुक्त तथा स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है।