प्रदर्शन के दौरान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एवं संस्थापक अमिताभ दुबे ने कहा कि ग्रीन आर्मी पिछले नौ वर्षों से तालाब संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और जन-जागरूकता के माध्यम से समाज को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित कर रही है। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर जैसे सुनियोजित शहर, जिसे हरित और संतुलित विकास का मॉडल माना जाता है, वहां बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई कर कंक्रीट संरचनाएं खड़ी करना आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा।
अमिताभ दुबे ने शासन से मांग की कि परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले संपूर्ण पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) सार्वजनिक किया जाए और वैकल्पिक भूमि पर इस परियोजना को स्थापित करने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाए।
इस अवसर पर रायपुर जिला अध्यक्ष गुरदीप टुटेजा ने कहा कि स्थानीय नागरिकों की भावनाओं की अनदेखी कर किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पेड़ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि जीवन, ऑक्सीजन और जल संतुलन का आधार है। यदि हजारों पेड़ों पर आरी चली, तो शहर का तापमान बढ़ेगा, भूजल स्तर प्रभावित होगा और जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।
ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नवा रायपुर क्षेत्र में लगभग 70 एकड़ भूमि पर फिल्म सिटी विकसित करने की योजना प्रस्तावित की गई है। सरकार का तर्क है कि इस परियोजना से फिल्म निर्माण, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, प्रस्तावित स्थल पर बड़ी संख्या में पेड़ों के प्रभावित होने की आशंका को लेकर पर्यावरण संगठनों और स्थानीय निवासियों में गहरी चिंता देखी जा रही है। विभिन्न आकलनों में सैकड़ों से लेकर हजारों पेड़ों की कटाई की संभावना जताई जा रही है, जिससे हरित क्षेत्र में कमी, स्थानीय तापमान में वृद्धि, जल संरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव और वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान की आशंका है।
ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि केवल पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए है। संगठन ने शासन से अपील की है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए पारदर्शिता के साथ सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और जनता की सहमति के बिना किसी भी प्रकार की पेड़ कटाई न की जाए।