ग्रेफाइट प्लांट से नदी में केमिकलयुक्त पानी छोड़ने का आरोप, ग्रामीणों ने मवेशियों की मौत और फसल बर्बादी की शिकायत की
बलरामपुर के महावीरगंज स्थित ग्रेफाइट केमिकल प्लांट पर ग्रामीणों ने बिना शोधन के केमिकलयुक्त पानी बांकी नदी में छोड़ने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि इससे फसलें प्रभावित हो रही हैं, मवेशी बीमार पड़ रहे हैं और अब तक 10 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है। मामले में एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत महावीरगंज में स्थित ग्रेफाइट केमिकल प्लांट को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाले केमिकलयुक्त और गंदे पानी को बिना उचित शोधन के पास से गुजरने वाली बांकी नदी में छोड़ा जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक नदी के पानी के प्रदूषित होने से आसपास के कई गांवों में खेती, पशुधन और लोगों के दैनिक जीवन पर असर पड़ रहा है
ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट में ग्रेफाइट के साथ विभिन्न प्रकार के केमिकल का उत्पादन किया जाता है। इन गतिविधियों से निकलने वाले अपशिष्ट जल के उचित निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण कथित तौर पर गंदा पानी नदी में पहुंच रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि वे इसी नदी के पानी का इस्तेमाल खेतों की सिंचाई के लिए करते हैं, जिसके चलते धान की फसल पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
फसल बर्बादी और मवेशियों पर असर
ग्रामीणों के अनुसार नदी के पानी का इस्तेमाल करने वाले किसानों के खेत प्रभावित हुए हैं और कई जगह फसल खराब होने की स्थिति बनी है। सबसे अधिक चिंता मवेशियों को लेकर जताई जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि नदी का पानी पीने के बाद कई पशु बीमार पड़े और अब तक 10 से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि नदी का पानी नहाने और घरेलू कार्यों में इस्तेमाल करने से त्वचा संबंधी परेशानी सामने आ रही है। ग्रामीणों के अनुसार पानी के संपर्क में आने के बाद खाज-खुजली और छाले जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। हालांकि इन स्वास्थ्य संबंधी दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
चार महीने पहले दोबारा शुरू हुआ प्लांट
ग्रामीणों के मुताबिक यह प्लांट करीब 10 साल पहले स्थापित हुआ था, लेकिन लंबे समय तक बंद रहा। लगभग चार महीने पहले इसे दोबारा शुरू किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट संचालन के दौरान प्रदूषित पानी के निस्तारण के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का पर्याप्त पालन नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री में वॉटर ट्रीटमेंट और अपशिष्ट जल के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि केमिकलयुक्त पानी नदी में न पहुंचे। इसी मांग को लेकर ग्रामीणों ने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत किए जाने का दावा किया है।
एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
ग्रामीणों ने मामले को गंभीर बताते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते नदी में कथित रूप से छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी पर रोक नहीं लगाई गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अब ग्रामीणों की शिकायत के बाद प्रशासनिक जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और संबंधित विभाग प्लांट के संचालन, अपशिष्ट जल के निस्तारण तथा नदी के पानी की गुणवत्ता को लेकर क्या कार्रवाई करता है, यह देखने वाली बात होगी।