नयाखानी और ठाकुर जोहरनी पर्व को लेकर गोंडवाना समाज ने जारी किया संदेश, शांतिपूर्ण आयोजन की अपील
गोंडवाना समाज समन्वय समिति जिला उत्तर बस्तर कांकेर ने नयाखानी (पूनापड़ूम) और गायता/ठाकुर जोहरनी पर्व को लेकर समाजजनों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ठाकुर जोहरनी पर्व 21 सितंबर और नयाखानी पर्व 23 सितंबर 2026 को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। समिति ने प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक एकता के साथ शांतिपूर्ण एवं गरिमापूर्ण आयोजन की अपील की है।
UNITED NEWS OF ASIA. राजेन्द्र मंडावी, कांकेर l गोंडवाना समाज समन्वय समिति, बस्तर संभाग के निर्देशानुसार इस वर्ष भी पारंपरिक नयाखानी (पूनापड़ूम) और ठाकुर जोहरनी पर्व मनाने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी सिलसिले में गोंडवाना समाज समन्वय समिति जिला उत्तर बस्तर कांकेर की ओर से समाज के विभिन्न पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। समिति ने ब्लॉक अध्यक्ष, सचिव, परिक्षेत्र अध्यक्ष, सर्कल अध्यक्ष और मुड़ादारों से अपने-अपने क्षेत्रों में समाजजनों को पर्व के महत्व की जानकारी देने और पारंपरिक तरीके से आयोजन के लिए जागरूक करने का आग्रह किया है।
समिति की ओर से जारी संदेश के अनुसार गायता/ठाकुर जोहरनी पर्व का आयोजन 21 सितंबर 2026, सोमवार को किया जाएगा। इसके बाद नयाखानी (पूनापड़ूम) पर्व 23 सितंबर 2026, बुधवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक परंपराओं के अनुरूप मनाया जाएगा। दोनों पर्वों को लेकर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। समिति ने संबंधित पदाधिकारियों को अपने-अपने ब्लॉक, मुड़ा, परिक्षेत्र और ग्राम स्तर पर समाजजनों के साथ समन्वय बनाकर कार्यक्रमों को व्यवस्थित रूप से आयोजित करने की अपील की है।
गोंडवाना समाज के अनुसार नयाखानी और ठाकुर जोहरनी पर्व केवल धार्मिक या सामाजिक आयोजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका संबंध आदिवासी समाज की रूढ़िगत परंपराओं, प्रकृति के प्रति आस्था और पूर्वजों से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत से है। नयाखानी पर्व नई फसल और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। वहीं ठाकुर जोहरनी पर्व भी समाज की पारंपरिक मान्यताओं और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। ऐसे पर्व समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समिति ने समाजजनों से अपील की है कि पर्व के दौरान सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सद्भाव को प्राथमिकता दी जाए। आयोजन पारंपरिक मर्यादाओं और सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुरूप शांतिपूर्ण एवं गरिमापूर्ण तरीके से किया जाए। साथ ही समाज के वरिष्ठजनों और नई पीढ़ी के बीच सांस्कृतिक परंपराओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़ी रहें।
गोंडवाना समाज समन्वय समिति ने कहा है कि पर्वों के माध्यम से समाज की सांस्कृतिक पहचान, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने का अवसर मिलता है। इसलिए सभी समाजजनों से उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए परंपराओं का सम्मान करने का आग्रह किया गया है। समिति ने अपने संदेश में नयाखानी (पूनापड़ूम) और ठाकुर जोहरनी पर्व के अवसर पर सभी समाजजनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भी दी हैं।
कांकेर जिले में इन दोनों पारंपरिक पर्वों को लेकर समाज के विभिन्न स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं। समिति ने पदाधिकारियों से कहा है कि वे अपने क्षेत्रों में आवश्यक समन्वय स्थापित करते हुए समाजजनों को पर्व के महत्व और आयोजन की परंपराओं के बारे में जानकारी दें। इस तरह नयाखानी और ठाकुर जोहरनी पर्व को सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और प्रकृति के प्रति आस्था के संदेश के साथ मनाने की तैयारी की जा रही है।