छत्तीसगढ़ प्रांत में भारतीय नारी विमर्श अध्येता समूह का ब्रेन स्ट्रॉमिंग सत्र सम्पन्न, कैलाशचन्द्र और डॉ. नूपुर ने दिए मार्गदर्शन
रायपुर में आयोजित ब्रेन स्ट्रॉमिंग सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक श्री कैलाशचन्द्र जी और नारी विमर्श क्षेत्र की विशेषज्ञ डॉ. नूपुर निखिल देशकर ने भारतीय नारी आदर्श, उनके कर्तव्य और शक्ति पर विस्तृत विचार साझा किए। सत्र में वैदिक, बुद्ध, मुगल, ब्रिटिश और स्वतंत्रता के बाद के कालखंड में महिलाओं की दशा पर भी प्रकाश डाला गया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर । छत्तीसगढ़ प्रांत के भारतीय नारी विमर्श अध्येता समूह का ब्रेन स्ट्रॉमिंग सत्र रविवार को सरस्वती शिक्षण संस्थान, रोहिणीपुरम में सम्पन्न हुआ। सत्र का मुख्य विषय भारतीय नारी आदर्श, उनके अधिकार और कर्तव्य, तथा समाज में उनके योगदान पर केंद्रित रहा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक और मध्य क्षेत्र प्रचार प्रमुख कैलाशचन्द्र जी ने कहा कि भारतीय दर्शन भेदरहित है। यह काला-गोरा, मोटा-पतला, स्त्री-पुरुष, बालक-बालिका में कोई भेद नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय नारी आदर्श भारत की ही नारियों में हैं और पश्चिम से अनुकरण आवश्यक नहीं। श्री कैलाशचन्द्र ने कहा, “जो भारत का नहीं है, जो भारत के लिए नहीं है, हमें ऐसी खरपतवार नहीं चाहिए।” उन्होंने भारतीय तत्वज्ञान और हजारों वर्षों के ज्ञान परंपरा के महत्व को रेखांकित किया।
सत्र की प्रारंभिक प्रस्तुति डॉ. नूपुर निखिल देशकर ने दी। उन्होंने कहा कि नारी अधिकारों की याचक नहीं, बल्कि कर्तव्यों की शक्ति हैं। स्वतंत्रता पूर्व और औपनिवेशिक काल में महिलाओं के विमर्श में विकृति आई, पश्चिमी साहित्यकारों और वैश्वीकरण के प्रभाव ने महिलाओं की सामाजिक छवि को प्रभावित किया।
सत्र में वर्ष 2024 में गठित अध्येता समूह की अध्ययन रिपोर्ट साझा की गई, जिसमें वैदिक, बुद्ध कालीन, मुगल, ब्रिटिश और स्वतंत्रता पश्चात के कालखंड में भारतीय महिलाओं की दशा और संघर्षों पर प्रकाश डाला गया। नम्रता मोदी, गगन गोयल, नीता मिश्रा, विनीता शर्मा और सरोज देवांगन ने पॉवरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से विभिन्न कालखंडों में महिलाओं की स्थिति और उनके योगदान को प्रस्तुत किया।
इस ब्रेन स्ट्रॉमिंग सत्र में छत्तीसगढ़ की प्रबुद्ध महिलाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन विनीता शर्मा ने किया। सत्र ने महिलाओं में अपनी शक्ति, कर्तव्य और सामाजिक योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।