हर परिणाम में बेटियां आगे, फिर महिला आरक्षण 33% क्यों नहीं? – कवर्धा से उठी आवाज
छत्तीसगढ़ माध्यमिक मंडल के 10वीं के परिणाम में कु. रिया केशरवानी द्वारा प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर बधाई देते हुए जनपद पंचायत कवर्धा की अध्यक्ष सुषमा गनपत बघेल ने बेटियों की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए महिला आरक्षण 33% लागू करने की मांग उठाई।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित 10वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। इसी कड़ी में कवर्धा निवासी कु. रिया केशरवानी ने प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि पर जनपद पंचायत कवर्धा की अध्यक्ष सुषमा गनपत बघेल ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
सुषमा गनपत बघेल ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक छात्रा की मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उस समर्पण, अनुशासन और पारिवारिक सहयोग का भी प्रतीक है, जो सफलता की नींव रखता है। उन्होंने रिया केशरवानी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि ऐसी बेटियां समाज के लिए प्रेरणा बनती हैं और आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कवर्धा जिले का शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा से एक विशेष स्थान रहा है और यहां के विद्यार्थी निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते आए हैं। इस बार भी रिया केशरवानी की सफलता ने इस परंपरा को और मजबूत किया है। यह उपलब्धि जिले के शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा व्यवस्था के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
इस अवसर पर सुषमा बघेल ने प्रदेश के सम्माननीय उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हायर सेकेंडरी स्कूलों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत से छात्रों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से बेहतर शिक्षा प्राप्त हो रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव अब परीक्षा परिणामों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। स्मार्ट क्लास के जरिए छात्रों की समझ, रुचि और सीखने की क्षमता में वृद्धि हुई है, जिससे वे बेहतर प्रदर्शन कर पा रहे हैं।
हालांकि, इस खुशी के अवसर पर सुषमा बघेल ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब हर परीक्षा परिणाम में बेटियां लगातार आगे बढ़ रही हैं और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं, तो फिर महिलाओं को 33% आरक्षण देने में देरी क्यों की जा रही है? उन्होंने यह सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को समान अवसर और अधिकार मिलना चाहिए, ताकि वे समाज और देश के विकास में और अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकें।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं, चाहे वह शिक्षा हो, प्रशासन हो या अन्य कोई क्षेत्र। ऐसे में महिला आरक्षण का मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलेगा, तो वे समाज के विकास में और अधिक प्रभावी योगदान दे सकेंगी।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि रिया केशरवानी की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह समाज में बदलाव की दिशा में एक मजबूत संकेत भी है। यह समय है कि हम बेटियों की इस सफलता को पहचानें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए हर संभव अवसर प्रदान करें। साथ ही, महिला सशक्तिकरण के लिए आवश्यक नीतियों को लागू कर उन्हें समाज में उचित स्थान दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।