लाखों का तटबंध 8 महीने में बेहाल! घोटिया में मनरेगा निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

बालोद जिले के ग्राम पंचायत घोटिया में मनरेगा के तहत बनाए गए करीब 140 मीटर लंबे तटबंध की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों द्वारा सामने लाए गए वीडियो में तटबंध के कई हिस्सों में टूट-फूट और मिट्टी के कटाव की स्थिति दिखाई दे रही है। सूचना पटल के अनुसार कार्य पर प्रशासकीय राशि, मजदूरी और सामग्री मद में कुल राशि दर्ज है। ग्रामीणों ने तकनीकी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। वहीं तकनीकी सहायक देवेंद्र भुआर्या का कहना है कि तटबंध के दोबारा निर्माण के लिए आदेश प्राप्त हुआ है और जल्द काम शुरू किया जाएगा।

Oct 1, 2026 - 10:57
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लाखों का तटबंध 8 महीने में बेहाल! घोटिया में मनरेगा निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l ग्राम पंचायत घोटिया में मनरेगा के तहत बनाए गए करीब 140 मीटर लंबे तटबंध की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के कुछ ही महीनों बाद तटबंध के कई हिस्सों में टूट-फूट और क्षति दिखाई देने लगी है। ग्रामीणों द्वारा सामने लाए गए वीडियो में तटबंध का किनारा कई जगह से टूटा हुआ नजर आ रहा है, जबकि कुछ हिस्सों में मिट्टी का कटाव भी दिखाई दे रहा है।

ग्रामीणों के आरोपों के अनुसार निर्माण कार्य में अपेक्षित गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि जब मनरेगा के तहत सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्माण कार्य कराया गया है और इसके लिए लाखों रुपये की राशि निर्धारित की गई है, तो इतने कम समय में तटबंध का क्षतिग्रस्त होना जांच का विषय है। हालांकि, निर्माण में भ्रष्टाचार या अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।

मौके पर लगाए गए सूचना पटल के अनुसार तटबंध की लंबाई 140 मीटर दर्ज है। पटल पर प्रशासकीय राशि 1,92,455 रुपये, मजदूरी राशि 2,90,825 रुपये और सामग्री राशि 1,70,630 रुपये दर्ज है। वहीं कार्य में 1,114 मानव दिवस का उल्लेख भी किया गया है। सूचना पटल के मुताबिक कार्य प्रारंभ होने की तारीख 2 फरवरी 2026 है। इस हिसाब से निर्माण शुरू हुए करीब आठ महीने का समय हुआ है।

ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की स्थिति को देखते हुए संबंधित विभाग से तकनीकी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर तकनीकी टीम भेजकर निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री और तटबंध की वर्तमान स्थिति का परीक्षण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

ग्रामीणों द्वारा सामने लाए गए वीडियो के बाद अब इस निर्माण कार्य को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं। खास तौर पर इतने कम समय में तटबंध के क्षतिग्रस्त होने की वजह जानना जरूरी माना जा रहा है। निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता और नुकसान के कारणों का पता तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

वहीं तकनीकी सहायक देवेंद्र भुआर्या ने बताया कि तटबंध के दोबारा निर्माण के लिए आदेश प्राप्त हुआ है। उनके अनुसार जल्द ही दोबारा निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुनर्निर्माण के दौरान निर्माण गुणवत्ता के मानकों का किस तरह पालन किया जाता है।

ग्रामीणों की मांग है कि केवल दोबारा निर्माण कराने के बजाय पहले मौजूदा तटबंध की स्थिति और पूर्व में किए गए कार्य की तकनीकी जांच भी कराई जाए, ताकि निर्माण की गुणवत्ता और क्षति के वास्तविक कारण सामने आ सकें।