दुर्ग नगर निगम में सार्वजनिक शौचालय टेंडर पर घमासान, पार्षदों ने लगाए घोटाले के आरोप

दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में शहर के 40 सार्वजनिक शौचालयों की सफाई और देखरेख के टेंडर को लेकर भाजपा पार्षदों के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। पार्षद कुलेश्वर साहू ने जांच रिपोर्ट के आधार पर बिना काम के भुगतान की तैयारी का आरोप लगाते हुए मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की। वहीं स्वास्थ्य प्रभारी नीलेश अग्रवाल ने टेंडर निरस्त किए जाने और पुराने समूह को नए टेंडर तक अस्थायी रूप से काम दिए जाने की बात कही।

Oct 1, 2026 - 11:05
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दुर्ग नगर निगम में सार्वजनिक शौचालय टेंडर पर घमासान, पार्षदों ने लगाए घोटाले के आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल, दुर्ग l दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में सार्वजनिक शौचालयों की सफाई और देखरेख के टेंडर को लेकर जमकर आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। शहर के 40 सार्वजनिक शौचालयों से जुड़े टेंडर और भुगतान प्रक्रिया को लेकर पार्षदों ने सवाल उठाए। कुछ पार्षदों ने जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए अनियमितता के आरोप लगाए, जबकि निगम के स्वास्थ्य प्रभारी ने पूरे मामले में नियमों के तहत कार्रवाई होने की बात कही।

मामला शहर के 40 सार्वजनिक शौचालयों की सफाई और रखरखाव से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार पहले दो स्व-सहायता समूहों को शौचालयों की सफाई और देखरेख का टेंडर दिया गया था। काम संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद टेंडर निरस्त कर दिया गया। इसके बाद भी पुराने समूह को अस्थायी रूप से काम सौंपे जाने और प्रति शौचालय 15 हजार रुपये के हिसाब से 10 महीने का भुगतान किए जाने की तैयारी को लेकर सवाल खड़े हुए।

वार्ड 35 के पार्षद कुलेश्वर साहू ने जांच समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि समिति में शामिल पार्षदों ने मौके पर जाकर शौचालयों का निरीक्षण किया। उनके अनुसार कई स्थानों पर केयरटेकर मौजूद नहीं मिले। कुलेश्वर साहू ने दावा किया कि यदि बिना काम किए भुगतान किया जाता है तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला होगा। उन्होंने कहा कि भुगतान होने की स्थिति में वे न्यायालय का रुख करेंगे।

वहीं निगम के स्वास्थ्य प्रभारी नीलेश अग्रवाल ने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि संबंधित टेंडर को नियमों के तहत निरस्त किया गया था। उनके अनुसार टेंडर निरस्त करते समय यह शर्त रखी गई थी कि नया टेंडर जारी होने तक पुराने समूह को दो से तीन महीने के लिए अस्थायी रूप से काम संभालने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

नीलेश अग्रवाल ने यह भी कहा कि शहर के कई सार्वजनिक शौचालय जर्जर स्थिति में हैं। उनके रखरखाव और सुधार के लिए राशि उपलब्ध कराई जा रही है और आवश्यक कार्य कराए जा रहे हैं। उनका कहना है कि टेंडर और रखरखाव की प्रक्रिया को नियमों के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है।

सामान्य सभा में सामने आए आरोपों के बाद अब सार्वजनिक शौचालयों की सफाई, देखरेख और भुगतान प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पार्षदों की ओर से जहां मौके पर काम की वास्तविक स्थिति और भुगतान प्रक्रिया की जांच की मांग की जा रही है, वहीं निगम की ओर से टेंडर निरस्तीकरण और अस्थायी व्यवस्था को नियमों के अनुरूप बताया गया है।

मामले में लगाए गए आरोपों और भुगतान से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों, जांच रिपोर्ट और निगम की आधिकारिक कार्रवाई से स्पष्ट होगी। फिलहाल सामान्य सभा में इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।