स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस का भाजपा सरकार पर हमला, तत्काल वापसी की घोषणा की मांग

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने दावा किया कि राज्य में पहला स्मार्ट मीटर जून 2024 में भाजपा शासनकाल में लगाया गया था और इसकी खरीद व कंपनी चयन की प्रक्रिया भी इसी दौरान हुई। कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर को वापस लेने, ऊर्जा प्रभार पर लगने वाले टैक्स को हटाने और बिजली बिल हाफ योजना फिर शुरू करने की मांग की है।

Aug 24, 2026 - 12:52
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स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस का भाजपा सरकार पर हमला, तत्काल वापसी की घोषणा की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर लगाए जाने को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर भाजपा की ओर से कांग्रेस शासनकाल का हवाला दिया जाना तथ्यात्मक रूप से गलत है।

सुशील आनंद शुक्ला ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में पहला स्मार्ट मीटर 14 जून 2024 को भाजपा शासनकाल में भिलाई-3 स्थित सीएसईबी कॉलोनी में लगाया गया था। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने का अनुबंध, ठेका देने और संबंधित कंपनी के चयन की प्रक्रिया भी भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही पूरी की गई थी। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य के बिजली उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर थोपने की जिम्मेदारी भाजपा सरकार की है।

कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार की स्मार्ट मीटर योजना को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने देशभर में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना तैयार की और राज्यों से इसके लिए सहमति मांगी गई। शुक्ला ने कहा कि यदि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिल बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं तो राज्य सरकार को इस व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर इसे वापस लेने का निर्णय लेना चाहिए।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से स्मार्ट मीटर को अनिवार्य नहीं बताए जाने के बाद राज्य सरकार के पास उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार इसे वापस लेने का विकल्प मौजूद है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं है तो सरकार उपभोक्ताओं की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है।

कांग्रेस ने बिजली बिल में लगने वाले ऊर्जा प्रभार पर भी सवाल उठाए हैं। सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं पर ऊर्जा प्रभार का 11 प्रतिशत टैक्स लगाया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी उपभोक्ता का बिजली बिल 4 हजार रुपये आता है तो उसमें करीब 440 रुपये ऊर्जा प्रभार के रूप में लगने वाले टैक्स के हो सकते हैं। कांग्रेस ने इस शुल्क को हटाने की मांग की है।

उन्होंने प्रदेश में 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना बंद किए जाने का मुद्दा भी उठाया। शुक्ला ने कहा कि इस योजना के बंद होने से बिजली उपभोक्ताओं पर बिल का अतिरिक्त भार बढ़ गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 400 यूनिट बिजली की खपत पर मौजूदा दरों के आधार पर करीब 2200 रुपये का बिल बन सकता है, जिसमें वीसीए और ऊर्जा प्रभार जैसे शुल्क शामिल नहीं हैं। कांग्रेस के अनुसार, बिल हाफ योजना लागू रहने पर उपभोक्ता को इस राशि में करीब 1100 रुपये की राहत मिल सकती थी।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर, ऊर्जा प्रभार और बिजली बिल हाफ योजना बंद होने के कारण आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। पार्टी ने राज्य सरकार से स्मार्ट मीटर व्यवस्था की समीक्षा करने, उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान करने और स्मार्ट मीटर को वापस लेने की घोषणा करने की मांग की है। साथ ही कांग्रेस ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना दोबारा लागू करने की मांग भी दोहराई है।