बताया जा रहा है कि अमरवाड़ा एसडीएम हेमकरण धुर्वे ने बीते दिनों निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान भवन की सतह के नीचे मौजूद काली मिट्टी को हटाकर मुरम डालने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद निर्माण कार्य को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
करीब 9 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस शासकीय भवन का निर्माण इस्कॉन इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड, परासिया द्वारा कराया जा रहा है। मध्य प्रदेश भवन विकास निगम को निर्माण एजेंसी बताया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े शासकीय भवन के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और निर्माण प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुरूप होना जरूरी है।
निर्माण स्थल पर सामने आई शिकायतों में सबसे प्रमुख सवाल नींव और भवन की सतह से जुड़े कार्यों को लेकर है। आरोप है कि मुरम की जगह काली मिट्टी का उपयोग किया गया। इसके अलावा निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सरिया में जंग दिखाई देने और रेत में डस्ट की मात्रा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि निर्माण स्थल से सामग्री के नमूने लेकर उनकी तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही नींव, सरिया, रेत, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच संबंधित तकनीकी अधिकारियों से कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण निर्धारित मापदंडों के अनुसार किया जा रहा है या नहीं।
वहीं, एसडीएम हेमकरण धुर्वे ने निर्माण को लेकर सामने आ रही शिकायतों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जैसे ही मुरम आती है, वैसे ही काली मिट्टी हटाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण से जुड़ी जो भी शिकायतें मिल रही हैं, उन पर निगरानी रखी जा रही है।
अब स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच तकनीकी जांच की मांग महत्वपूर्ण हो गई है। यदि जांच होती है तो निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, नींव की स्थिति और निर्माण प्रक्रिया में निर्धारित मानकों के पालन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
तहसील भवन अमरवाड़ा के लिए महत्वपूर्ण शासकीय परियोजना माना जा रहा है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन का निर्माण लंबे समय तक उपयोग में रहने को ध्यान में रखते हुए गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होना चाहिए। फिलहाल सामने आई शिकायतों और आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभाग की जांच और तकनीकी परीक्षण के बाद ही निर्माण गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।