आर्थिक शोषण के खिलाफ लामबंद कर्मचारी-अधिकारी और पेंशनर्स, 11 सितंबर को इंद्रावती भवन में करेंगे सांकेतिक प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ में नियमित, अनियमित कर्मचारी-अधिकारी और पेंशनर्स अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर 11 सितंबर 2026 को इंद्रावती भवन के सामने सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे। एक मांग-एक मंच अभियान के तहत होने वाले प्रदर्शन में 50 से अधिक कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने का दावा किया गया है। संगठनों ने जनवरी 2026 से महंगाई भत्ता, 86 माह का एरियर्स, अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण, आउटसोर्सिंग बंद करने, नगरीय निकाय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना और कैशलेस उपचार जैसी मांगें रखी हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में नियमित, अनियमित कर्मचारी-अधिकारी और पेंशनर्स अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लामबंद हो गए हैं। आर्थिक शोषण के खिलाफ क्रमिक आंदोलन के तहत 11 सितंबर 2026, शुक्रवार को इंद्रावती भवन के सामने भोजनावकाश के दौरान सांकेतिक प्रदर्शन किया जाएगा। एक मांग-एक मंच अभियान के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में इंद्रावती भवन और नवा रायपुर स्थित विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों के साथ 50 से अधिक कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की बात कही गई है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रदेश के सर्वांगीण विकास में शासकीय विभागों में कार्यरत नियमित और अनियमित कर्मचारी-अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद लंबे समय से कर्मचारियों से जुड़ी कई मांगों का समाधान नहीं होने से उनमें असंतोष बढ़ रहा है। संगठनों ने केंद्र के समान जनवरी 2026 से महंगाई भत्ता देने और 86 माह के एरियर्स का भुगतान करने की मांग प्रमुखता से उठाई है।
संगठनों के अनुसार अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण, आउटसोर्सिंग व्यवस्था बंद करने और न्यूनतम वेतन से जुड़े विषयों पर भी सरकार से लगातार मांग की जाती रही है। उनका कहना है कि न्यूनतम वेतन में पिछले नौ वर्षों से तथा संविदा वेतन में पिछले तीन वर्षों से वृद्धि नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में अनियमित कर्मचारियों के आर्थिक हित प्रभावित हो रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपे गए हैं और समस्याओं के शीघ्र समाधान का अनुरोध किया गया है। इसके बावजूद मांगों पर अपेक्षित गंभीरता से कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए अब आंदोलन का रास्ता अपनाया जा रहा है।
संगठनों ने छत्तीसगढ़ के लिए मोदी की गारंटी 2023 के वचनबद्ध सुशासन से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि कर्मचारी-अधिकारी और पेंशनर्स से संबंधित विभिन्न विषयों पर किए गए वादों के अनुरूप कार्रवाई की जानी चाहिए।
पांच सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन
एक मांग-एक मंच अभियान के तहत पांच प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा। इनमें जनवरी 2026 से कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई भत्ता जारी करने के साथ 86 महीनों के एरियर्स का भुगतान शामिल है। इसके अलावा अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण, निकाले गए कर्मचारियों की बहाली, न्यून मानदेय कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने और अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालीन करने की मांग रखी गई है। संगठनों ने आउटसोर्सिंग और ठेका व्यवस्था के माध्यम से नियोजन की प्रणाली बंद करने की भी मांग की है।
नगरीय निकाय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने तथा स्वास्थ्य विभाग में लैब और फार्मेसी से संबंधित ठेका पद्धति समाप्त करने की मांग भी आंदोलन में शामिल है। इसके साथ ही नियमित और अनियमित कर्मचारियों तथा पेंशनर्स के लिए मध्यप्रदेश की तर्ज पर 20 लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा लागू करने की मांग की गई है।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी संगठन इंद्रावती भवन के नोडल अधिकारी को मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार तक कर्मचारियों की मांगों और समस्याओं को एकजुट होकर पहुंचाना बताया गया है।
संगठन प्रमुख करन सिंह अटेरिया, छत्तीसगढ़ प्रदेश अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ठाकुर और छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू के नेतृत्व में यह सांकेतिक प्रदर्शन प्रस्तावित है। आयोजकों ने प्रदेश के सभी नियमित, अनियमित अधिकारी-कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों से प्रदर्शन में शामिल होकर कर्मचारियों की मांगों को मजबूती से उठाने की अपील की है।