छात्रावासों में वाशिंग मशीन उपलब्ध कराने की मांग, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग ने मंत्री व आयुक्त को भेजा पत्र

कांकेर में सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष ललित नरेटी ने छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय आश्रम एवं छात्रावासों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में वाशिंग मशीन उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने आदिम जाति कल्याण मंत्री और विभागीय आयुक्त को मांग पत्र भेजकर प्रति 50 विद्यार्थियों पर कम से कम एक वाशिंग मशीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि बारिश के मौसम में कपड़े धोने और सुखाने में विद्यार्थियों को परेशानी होती है, जिससे स्वच्छता और स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने मशीनों के रखरखाव, मरम्मत और विद्युत व्यय के लिए भी आवश्यक बजट का प्रावधान करने की मांग की है।

Aug 29, 2026 - 09:56
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छात्रावासों में वाशिंग मशीन उपलब्ध कराने की मांग, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग ने मंत्री व आयुक्त को भेजा पत्र

UNITED NEWS OF ASIA. राजेंद्र मंडावी, कांकेर l छत्तीसगढ़ के शासकीय आश्रम एवं छात्रावासों में रहने वाले छात्र-छात्राओं की सुविधा, स्वच्छता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष ललित नरेटी ने प्रदेशभर के छात्रावासों में वाशिंग मशीन उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। उन्होंने इस संबंध में आदिम जाति कल्याण मंत्री और विभागीय आयुक्त को मांग पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

ललित नरेटी ने अपने मांग पत्र में कहा है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में शासकीय आश्रम एवं छात्रावास संचालित हैं, जहां ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले विद्यार्थी रहकर अध्ययन करते हैं। विद्यार्थियों को भोजन, आवास और शिक्षा के साथ दैनिक जीवन की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। कपड़ों की नियमित धुलाई और स्वच्छता इसी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में छात्रावासों में कपड़े धोने और उन्हें सुखाने की समस्या बढ़ जाती है। लगातार बारिश और पर्याप्त धूप नहीं मिलने के कारण कपड़े समय पर सूख नहीं पाते। कई विद्यार्थियों के पास सीमित संख्या में कपड़े होते हैं, ऐसे में धुलाई और सुखाने की परेशानी उनके लिए असुविधा का कारण बनती है। स्वच्छ और सूखे कपड़ों की उपलब्धता विद्यार्थियों की व्यक्तिगत स्वच्छता तथा स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है।

ललित नरेटी ने कहा कि लंबे समय तक गीले रहने वाले कपड़ों के इस्तेमाल से त्वचा संबंधी परेशानियों और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसी परिस्थितियां विद्यार्थियों की पढ़ाई और एकाग्रता को भी प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए छात्रावासों में कपड़ों की धुलाई के लिए व्यावहारिक और स्थायी व्यवस्था उपलब्ध कराना जरूरी है।

उन्होंने बालिका छात्रावासों में स्वच्छता व्यवस्था को विशेष महत्व देने की मांग की। उनका कहना है कि छात्राओं की दैनिक स्वच्छता संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए साफ और सूखे कपड़ों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। बेहतर सुविधाएं मिलने से छात्राओं को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे अपने अध्ययन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।

50 विद्यार्थियों पर एक वाशिंग मशीन की मांग

सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग ने मांग की है कि प्रदेश के प्रत्येक शासकीय आश्रम एवं छात्रावास में विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर वाशिंग मशीन उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने प्रति 50 विद्यार्थियों पर कम से कम एक वाशिंग मशीन उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही मशीनों के नियमित रखरखाव, मरम्मत और संचालन के लिए भी आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि केवल वाशिंग मशीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसके संचालन के लिए बिजली खर्च और रखरखाव की राशि का भी प्रावधान होना चाहिए। इससे मशीनों का नियमित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा और तकनीकी खराबी आने पर समय पर मरम्मत भी कराई जा सकेगी।

ललित नरेटी ने कहा कि छात्रावासों में आधुनिक और उपयोगी सुविधाओं की उपलब्धता विद्यार्थियों के जीवन को बेहतर बनाने के साथ उनके स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने शासन और विभागीय अधिकारियों से प्रदेश के सभी शासकीय आश्रम एवं छात्रावासों में विद्यार्थियों की संख्या का आकलन कर वाशिंग मशीन उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक बजट और कार्ययोजना तैयार करने की मांग की है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि आदिम जाति कल्याण विभाग विद्यार्थियों के हित से जुड़ी इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगा और प्रदेश के छात्रावासों में स्वच्छता एवं सुविधा को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।