धमतरी में किसानों के लिए DDSR धान तकनीक पर गोष्ठी, कम पानी में अधिक उत्पादन की जानकारी
धमतरी के भखारा में किसानक्राफ्ट द्वारा आयोजित गोष्ठी में सूखी सीधी बुआई धान (DDSR) प्रौद्योगिकी पर चर्चा की गई। इस तकनीक से पारंपरिक धान की तुलना में पानी की बचत, लागत में कमी और अधिक उत्पादन संभव है। किसानों ने नई तकनीक अपनाने में रुचि दिखाई।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी । किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से विकासखंड कुरूद के ग्राम भखारा में किसानक्राफ्ट द्वारा सूखी सीधी बुआई धान (Dry Direct Seeded Rice – DDSR) प्रौद्योगिकी पर एकदिवसीय गोष्ठी और प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को DDSR तकनीक के लाभ और उपयोगिता से अवगत कराना था। इस तकनीक के माध्यम से पारंपरिक धान की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत पानी की बचत होती है और उर्वरक, कीटनाशक व श्रम लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।
कृषि विस्तार अधिकारी कल्याण सिंह ध्रुव ने बताया कि पारंपरिक धान की खेती में एक किलोग्राम धान के लिए लगभग 5,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जबकि DDSR विधि में केवल 2,000 से 2,500 लीटर पानी पर्याप्त होता है। यह तकनीक कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक अपनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि धान की खेती भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है और ऐसी तकनीकें पानी की कमी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद करेंगी।
किसानक्राफ्ट के बीज अनुसंधान प्रमुख डॉ. सुमन्त होल्ला ने बताया कि DDSR विधि से मिट्टी की उर्वरता के अनुसार उपज बढ़ाई जा सकती है। यह विधि स्वाद और गुणवत्ता पर कोई असर नहीं डालती, लेकिन खेती की लागत कम कर किसानों की लाभप्रदता बढ़ाती है। डेवलपमेंट मैनेजर किशनजीत सिन्हा ने कहा कि इस तकनीक में नर्सरी तैयार करने, रोपाई करने या खेतों में पानी रोकने की आवश्यकता नहीं होती। यह पर्यावरण के अनुकूल तकनीक है और मीथेन उत्सर्जन को भी कम करती है।
कार्यक्रम में किसानक्राफ्ट की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें छोटे किसानों के लिए विकसित कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। किसानों ने इन मशीनों में गहरी रुचि दिखाई और DDSR तकनीक अपनाने की इच्छा जताई।
स्टेट मैनेजर सीताराम कौशिक ने बताया कि किसानक्राफ्ट देशभर में 5,000 से अधिक डीलरों, एक विनिर्माण इकाई और 14 क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ाने के लिए समर्पित है।
गोष्ठी में किसानों ने नई तकनीक और यंत्रों की जानकारी प्राप्त कर इसे अपनाने का संकल्प लिया। आयोजन ने धमतरी के किसानों को कम पानी, कम लागत और अधिक लाभ के साथ धान उत्पादन की दिशा में प्रेरित किया।