चार महीने से अंधेरे में डूबा आमझर गांव, बारिश से पहले बढ़ी ग्रामीणों की चिंता
धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र स्थित आमझर गांव में पिछले चार महीनों से सोलर प्लांट बंद होने के कारण ग्रामीण अंधेरे में जीवन गुजार रहे हैं। बारिश का मौसम नजदीक आने से जहरीले सांप और जंगली जानवरों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र में बसे ग्राम आमझर के ग्रामीण पिछले चार महीनों से अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। गांव में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लगाए गए क्रेडा के सोलर प्लांट बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। बारिश का मौसम करीब आते ही गांव में जहरीले सांप, कीड़े-मकोड़ों और जंगली जानवरों का खतरा भी बढ़ने लगा है। ऐसे हालात में ग्रामीणों की चिंता और ज्यादा बढ़ गई है।
टाइगर रिजर्व क्षेत्र के भीतर स्थित ग्राम आमझर आज भी सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह वंचित नजर आता है। जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत खल्लारी के आश्रित इस गांव में ग्रामीणों की सुविधा के लिए चार जगह सोलर प्लांट लगाए गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान में चारों प्लांट लगभग बंद पड़े हैं और गांव में रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। उनके अनुसार क्रेडा के अधिकारी गांव तो पहुंचते हैं, लेकिन समस्या का निराकरण नहीं करते। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारी दिन में धूप के समय सोलर पैनल चालू कर यह कहकर लौट जाते हैं कि बिजली व्यवस्था ठीक है, जबकि शाम ढलते ही सिस्टम बंद हो जाता है।
ग्रामीण महेतु मंडावी और महेश मरकाम ने बताया कि बारिश शुरू होते ही जंगलों में हरियाली बढ़ जाती है और जहरीले सांप व कीड़े-मकोड़े घरों तक पहुंचने लगते हैं। गांव में अंधेरा रहने के कारण रात के समय हमेशा खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि गांव का रास्ता भी बेहद कठिन है और ऐसी स्थिति में रात गुजारना जोखिम भरा हो जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बारिश शुरू होने से पहले सोलर व्यवस्था को दुरुस्त कराया जाए।
गांव के बच्चों की पढ़ाई भी बिजली संकट से प्रभावित हो रही है। ग्रामीण बलीहार कुंजाम, बरसन कुंजाम और गोपाल कुंजाम ने बताया कि राशन दुकानों में अब पर्याप्त मात्रा में केरोसिन भी नहीं मिलता। ऐसे में बच्चे लालटेन और ढिबरी के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कच्चे घरों और कीचड़ वाले इलाके में रात के समय हमेशा डर बना रहता है कि कोई जहरीला जीव घर में घुस सकता है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव का जो सोलर प्लांट सही तरीके से चल रहा था, उसका इन्वर्टर भी अधिकारी निकालकर ले गए। केशनाथ नेताम, निरा बाई नेताम, सरिता बाई और मानबाई कुंजाम ने बताया कि बाकी तीन प्लांट भी केवल नाम मात्र के लिए चल रहे हैं और कुछ ही मिनटों में बंद हो जाते हैं। ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि अधिकारी एक रात गांव में बिताएं तो उन्हें असली परेशानी का एहसास होगा।
इस पूरे मामले में क्रेडा अधिकारी धनेंद्र देवागन का कहना है कि गांव के एक प्लांट का इन्वर्टर निकाला गया है, लेकिन बाकी तीन प्लांट चालू हैं। उन्होंने दावा किया कि गांव के सभी प्लांट पूरी तरह बंद नहीं हैं।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जमीनी स्थिति अधिकारियों के दावों से बिल्कुल अलग है। गांव में लगातार अंधेरा रहने से लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है और बच्चों का भविष्य भी संकट में पड़ता जा रहा है। अब ग्रामीण प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।