दिल्ली में सरकारी जमीन की निगरानी अब ड्रोन से, अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू

दिल्ली में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण रोकने के लिए उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने डीडीए को जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। ड्रोन सर्वे, जियो-टैगिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए अवैध कब्जों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

Jul 4, 2026 - 15:56
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दिल्ली में सरकारी जमीन की निगरानी अब ड्रोन से, अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू

UNITED NEWS OF ASIA. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) आधुनिक तकनीकों का सहारा लेगा। उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने डीडीए को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राजधानी में सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए। इसके तहत ड्रोन सर्वे, जियो-टैगिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग कर अवैध गतिविधियों की समय रहते पहचान कर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

डीडीए की सलाहकार परिषद की बैठक में शहरी विकास और भूमि प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों की समीक्षा की गई। बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने अधिकारियों से कहा कि सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे और निर्माण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों को नियमित निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि अप्रैल 2025 से अब तक 241.51 एकड़ सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। इसके अलावा विकास क्षेत्रों में 235.96 एकड़ भूमि पर किए गए अवैध निर्माण भी हटाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार यह अभियान लगातार जारी रहेगा और भविष्य में निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।

भूमि प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए डीडीए ने 14 फ्लाइंग स्क्वॉड गठित किए हैं। ये टीमें फील्ड सर्वे दलों के साथ मिलकर नियमित निरीक्षण कर रही हैं, ताकि किसी भी नए अवैध कब्जे या निर्माण की जानकारी तुरंत मिल सके और समय रहते कार्रवाई की जा सके।

डीडीए, नगर निगम और सर्वे ऑफ इंडिया के संयुक्त प्रयास से पूरी दिल्ली का व्यापक ड्रोन सर्वे भी कराया जा रहा है। कुल 1,370 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में प्रस्तावित इस सर्वे में अब तक 1,122 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही ओ-जोन क्षेत्र का ड्रोन सर्वे भी पूरा होने की जानकारी दी गई है।

डीडीए अपने वैकेंट लैंड मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से 21,773 एकड़ क्षेत्र में फैले 3,700 से अधिक भूखंडों की जियो-टैगिंग कर रहा है। इन भूखंडों की समय-समय पर फोटो आधारित निगरानी भी की जा रही है, जिससे किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे या निर्माण का तुरंत पता लगाया जा सके।

बैठक में उपराज्यपाल ने अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि किसी मामले में आर्किटेक्ट की भूमिका सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति को पैनल से हटाकर ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही असुरक्षित इमारतों की जानकारी तत्काल नगर निगम को भेजने और फ्लाइंग स्क्वॉड व क्विक रिस्पॉन्स टीमों को लगातार सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए, ताकि अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ मौके पर ही प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।