बिजली सप्लाई में निजी क्षेत्र की एंट्री का कांग्रेस ने किया विरोध, दीपक बैज बोले-सरकारी बिजली कंपनी बेचने की तैयारी
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बिजली सप्लाई में निजी कंपनियों को लाइसेंस देने और सरकारी बिजली कंपनियों को शेयर बाजार के जरिए निजीकरण की दिशा में ले जाने के सरकार के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सार्वजनिक बिजली व्यवस्था पर निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी कर रही है और इससे आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। बैज ने सरकार से बिजली वितरण व्यवस्था को पूरी तरह सार्वजनिक नियंत्रण में रखने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में बिजली सप्लाई के क्षेत्र में निजी कंपनियों को लाइसेंस देने और सरकारी बिजली कंपनियों को शेयर बाजार के माध्यम से सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि बिजली वितरण एक अत्यावश्यक सार्वजनिक सेवा है और इस पर सरकार का प्रत्यक्ष एवं पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी कंपनियों को बिजली वितरण के क्षेत्र में प्रवेश देने के लिए मौजूदा नियमों में बदलाव किया जा रहा है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
दीपक बैज ने कहा कि बिजली व्यवस्था का संचालन जनसुविधा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए, जबकि निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से वितरण व्यवस्था में लाइसेंसिंग प्रणाली लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी बिजली व्यवस्था में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को लेकर कांग्रेस अपनी आपत्ति दर्ज करा रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मंत्रिपरिषद द्वारा आमजन और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से 200 करोड़ रुपये तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर या बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। बैज ने इसे सरकारी बिजली कंपनी को निजीकरण की दिशा में ले जाने वाला कदम बताया।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विद्युत कंपनियां आत्मनिर्भर हैं और राज्य के पास बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। उनके अनुसार राज्य में उत्पादित बिजली की वितरण व्यवस्था सरकारी बिजली कंपनियों के माध्यम से संचालित होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी कंपनी के शेयर बाजार में आने के बाद निजी निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना है, जिससे भविष्य में इसके निजीकरण का रास्ता खुल सकता है।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से बिजली उपभोक्ताओं पर पहले ही आर्थिक बोझ बढ़ा है। उन्होंने स्मार्ट मीटर के माध्यम से अधिक वसूली, बिजली की बढ़ी हुई कीमतों और 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना को बंद किए जाने का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि इन परिस्थितियों के बावजूद यदि सरकार विद्युत कंपनी को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय उसके निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ती है तो यह आम जनता के हित में नहीं होगा।
उन्होंने भाजपा सरकार पर सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को लेकर भी निशाना साधा। बैज ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को निजी हाथों में सौंपना भाजपा की पुरानी नीति रही है और अब राज्य की महत्वपूर्ण विद्युत व्यवस्था को भी इसी दिशा में ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से बिजली वितरण प्रणाली को सार्वजनिक क्षेत्र के नियंत्रण में बनाए रखने की मांग की।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकता को केवल व्यावसायिक लाभ के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार को उपभोक्ताओं के हित, सस्ती बिजली और निर्बाध आपूर्ति को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने बिजली कंपनियों में प्रस्तावित बदलावों को लेकर सरकार से स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने और निजीकरण की आशंकाओं को दूर करने की मांग की।
कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से पार्टी की ओर से सरकार की बिजली संबंधी नीतियों पर आपत्ति दर्ज कराई। कांग्रेस ने कहा कि बिजली व्यवस्था में किसी भी बड़े बदलाव से पहले उपभोक्ताओं और सार्वजनिक हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।