स्मार्ट मीटर वापस ले सरकार, बढ़े बिजली बिलों पर कांग्रेस का हमला

प्रदेश कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था को वापस लेने की मांग करते हुए राज्य सरकार पर बिजली उपभोक्ताओं से अधिक बिल वसूलने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में भारी वृद्धि हुई है और लोगों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

Jun 25, 2026 - 13:24
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स्मार्ट मीटर वापस ले सरकार, बढ़े बिजली बिलों पर कांग्रेस का हमला

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l प्रदेश कांग्रेस ने राज्य सरकार से स्मार्ट मीटर व्यवस्था को वापस लेने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि नई प्रणाली के कारण आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कांग्रेस का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे आम जनता परेशान है।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने जारी बयान में कहा कि स्मार्ट मीटर के माध्यम से वास्तविक खपत से अधिक रीडिंग दर्ज होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उनका दावा है कि कई उपभोक्ताओं का इस माह का बिजली बिल सामान्य से दो से तीन गुना तक अधिक आया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार सभी घरों में स्मार्ट मीटर लगाकर बिजली उपभोक्ताओं से अधिक राशि वसूल रही है।

कांग्रेस ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं के बीच यह धारणा बनी है कि बिजली की खपत सामान्य मीटर की तुलना में अधिक दर्ज हो रही है। पार्टी का कहना है कि प्रत्येक उपभोक्ता को अपनी वास्तविक बिजली खपत जानने और उसकी पारदर्शी जांच कराने का अधिकार है।

वंदना राजपूत ने यह भी आरोप लगाया कि पहले जहां चेक मीटर के माध्यम से मीटर की जांच की व्यवस्था उपलब्ध थी, वहीं अब मीटर की जांच के लिए उपभोक्ताओं से एक हजार से पंद्रह सौ रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता को मीटर में गड़बड़ी की आशंका है तो उसकी जांच बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के कराई जानी चाहिए। पार्टी ने इस शुल्क व्यवस्था को अनुचित बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की है।

कांग्रेस ने बिजली दरों में वृद्धि का मुद्दा भी उठाया। पार्टी का आरोप है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बिजली दरों में लगातार कई बार वृद्धि की गई है। कांग्रेस के अनुसार हाल ही में विद्युत ईंधन अधिभार (एमपीपीएस) के रूप में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू की गई, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है।

बयान में यह भी कहा गया कि प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को जून माह में औसत से कहीं अधिक बिजली बिल प्राप्त हुए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि एक ओर उपभोक्ता बिजली कटौती से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़े हुए बिजली बिलों का सामना भी कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि सरकार को पहले निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए और उसके बाद उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डालने वाले निर्णयों पर पुनर्विचार करना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस ने राज्य सरकार से स्मार्ट मीटर योजना की समीक्षा करने, बढ़े हुए बिजली बिलों की निष्पक्ष जांच कराने, मीटर परीक्षण की प्रक्रिया को निशुल्क करने तथा आम उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि लोगों की शिकायतों का समाधान नहीं किया गया तो बिजली उपभोक्ताओं की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।