धमतरी के आदिवासी अंचल में 50 वर्ष बाद रबी सीजन की खेती की ऐतिहासिक शुरुआत, 35 एकड़ में रागी उत्पादन

धमतरी जिले के आदिवासी बहुल डांगीमांचा और खिड़कीटोला गांवों में लगभग 50 वर्षों बाद रबी सीजन में संगठित खेती शुरू हुई है। आत्मा योजना के तहत 35 एकड़ में रागी की खेती कर कृषकों को नई दिशा मिली है।

Jan 13, 2026 - 14:01
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धमतरी के आदिवासी अंचल में 50 वर्ष बाद रबी सीजन की खेती की ऐतिहासिक शुरुआत, 35 एकड़ में रागी उत्पादन

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी | जिले के वनांचल एवं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कृषि के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। विकासखंड धमतरी के ग्राम डांगीमांचा एवं खिड़कीटोला में लगभग 50 वर्षों के बाद पहली बार रबी सीजन में संगठित खेती की शुरुआत की गई है। कृषि विभाग द्वारा संचालित कृषि सुधार एवं विस्तार कार्यक्रम “आत्मा” योजना के अंतर्गत इन गांवों में लगभग 35 एकड़ क्षेत्रफल में लघु धान्य फसल रागी (मिलेट) की खेती की जा रही है।

यह क्षेत्र गंगरेल बांध के उच्चहन क्षेत्र में स्थित है, जहां ऊंचाई अधिक होने और विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अब तक रबी फसलों की खेती संभव नहीं हो पा रही थी। वनाच्छादित और आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में रागी की खेती को एक वैकल्पिक और जलवायु अनुकूल फसल के रूप में अपनाया गया है, जिससे किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और आय प्राप्त होने की उम्मीद है।

इस पहल को लेकर कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले के आदिवासी क्षेत्रों में लघु धान्य फसलों को बढ़ावा देना शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। गंगरेल उच्चहन क्षेत्र में 50 वर्षों बाद रबी सीजन की खेती की शुरुआत ऐतिहासिक उपलब्धि है। आत्मा योजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, SMI (Systematic Millets Intensification) पद्धति, बीज उत्पादन और उन्नत खेती की जानकारी देकर उनकी आय बढ़ाने तथा पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। भविष्य में मिलेट आधारित खेती को और अधिक विस्तार देते हुए किसानों को बाजार से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

विगत सप्ताह जिले में आयोजित मिलेट महोत्सव के पश्चात 10 जनवरी 2026 को आत्मा एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम स्तर पर कृषक पाठशाला का आयोजन किया गया। इसमें ग्राम पंचायत तुमराबहार के सरपंच श्री दीपक राम ध्रुव, आत्मा के डीपीडी  फत्ते लाल पटेल, आरएईओ  बी.एस. मंडावी, बीटीएम  खिलेश कुमार साहू, एटीएम  छगन साहू सहित कुल 40 महिला कृषक एवं 32 पुरुष कृषक उपस्थित रहे।

कृषक पाठशाला में रागी फसल की उन्नत खेती, बीज उत्पादन, पोषक तत्व प्रबंधन, कीट-रोग नियंत्रण, लागत कम कर अधिक लाभ प्राप्त करने की तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही रागी के पोषण एवं स्वास्थ्य लाभ तथा बाजार संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया। उपस्थित कृषकों ने क्षेत्र में रागी की खेती को आगे और विस्तार देने की सहमति व्यक्त की, जिससे आदिवासी अंचल में कृषि और आजीविका का नया मार्ग प्रशस्त हुआ है।