चिरमिरी में राममय हुआ माहौल, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रीराम कथा में लिया आशीर्वाद

एमसीबी जिले के चिरमिरी में आयोजित नव दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान चिरमिरी में 151 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा स्थापना की घोषणा भी चर्चा का केंद्र रही।

May 23, 2026 - 12:25
May 23, 2026 - 13:45
 0  13
चिरमिरी में राममय हुआ माहौल, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रीराम कथा में लिया आशीर्वाद

UNITED NEWS OF ASIA. जमील अंसारी एमसीबी जिले के चिरमिरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित नव दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव में गुरुवार को भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा स्थल पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पूरा परिसर राममय हो उठा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय श्रीराम कथा में शामिल हुए और प्रख्यात संत जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज से प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और विकास के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह पूरे प्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है कि लोगों को महान संत के सान्निध्य में भगवान श्रीराम की कथा सुनने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि रामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को मर्यादा, संस्कार, सद्भाव और मानवता का संदेश देने वाला माध्यम है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्श आज भी समाज को सही दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित कई जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा पंडाल जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारों से गूंजता रहा।

कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण उस समय बना जब व्यासपीठ से जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को चिरमिरी में 151 फीट ऊंची भगवान हनुमान की भव्य प्रतिमा स्थापित कराने का गुरु आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने इसे सहर्ष स्वीकार करते हुए प्रतिमा स्थापना के लिए अपनी सहमति जताई। घोषणा के साथ ही श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल बन गया और कथा स्थल जयकारों से गूंज उठा।

विगत 17 मई से जारी श्रीराम कथा के पांचवें दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज ने धनुष भंग और सीता-राम विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मिथिला नरेश जनक द्वारा आयोजित स्वयंवर में भगवान शिव के दिव्य धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी गई थी। अनेक राजा और राजकुमार प्रयास करने के बाद भी धनुष को हिला नहीं सके, लेकिन भगवान श्रीराम ने सहज भाव से धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाई और धनुष भंग हो गया।

कथा के दौरान रामभद्राचार्य जी महाराज ने भगवान राम और माता सीता के विवाह प्रसंग का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि यह मिलन धर्म, आदर्श और मर्यादा का सर्वोच्च प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रामकथा मनुष्य को सत्य, संयम और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देती है।

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने जीवन को सार्थक बनाने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि “बचपन को शुद्ध, यौवन को प्रबुद्ध और बुढ़ापे को सिद्ध” करना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने सनातन संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में परमात्मा स्वयं मानव रूप में अवतरित होकर धर्म और मर्यादा का मार्ग दिखाते हैं।

पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिला। कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष वातावरण बना रहा, जिसने चिरमिरी को पूरी तरह राममय बना दिया।