रायपुर में जारी बयान में वंदना राजपूत ने कहा कि फीस प्रतिपूर्ति की राशि में वृद्धि नहीं किए जाने के कारण निजी स्कूल आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश देने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की केंद्र में रही यूपीए सरकार ने गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से आरटीई कानून लागू किया था, लेकिन वर्तमान में राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार इस व्यवस्था में बाधा उत्पन्न कर रही है।
उन्होंने बताया कि निजी स्कूल संचालकों की मांगें भी पूरी तरह से अनुचित नहीं हैं। वर्ष 2011 में तय की गई फीस दरों के आधार पर ही अब तक भुगतान किया जा रहा है, जबकि पिछले 14 वर्षों में महंगाई, वेतन और अन्य शैक्षणिक खर्चों में काफी वृद्धि हो चुकी है। ऐसे में सरकार को अपनी जिद छोड़कर निजी स्कूलों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह केवल स्कूलों और सरकार के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि लाखों गरीब विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले का जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा से वंचित रह सकते हैं।
वंदना राजपूत ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर इस विवाद को सुलझाने में रुचि नहीं दिखा रही है, जिससे यह प्रतीत होता है कि वह गरीब बच्चों को शिक्षा का अधिकार देने के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों ने पहले ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और फीस वृद्धि नहीं होने तक आरटीई के तहत प्रवेश नहीं देने की घोषणा कर दी है।
प्रदेश में 6500 से अधिक निजी स्कूलों द्वारा 28 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को लिखित रूप में यह सूचना दी गई है कि वे आरटीई के तहत नए एडमिशन नहीं करेंगे। इससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार तुरंत निजी स्कूल प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर गतिरोध समाप्त करे।
अंत में कांग्रेस ने सुझाव दिया कि आरटीई भर्ती से जुड़े नियमों में किए गए बदलावों को वापस लिया जाए और फीस बढ़ोतरी पर सार्थक चर्चा कर समाधान निकाला जाए। पार्टी का कहना है कि सरकार का उद्देश्य शिक्षा पर खर्च कम करना नहीं, बल्कि अधिक से अधिक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना होना चाहिए।