महावीर जयंती पर रायपुर में मांस-मटन बिक्री प्रतिबंधित, महापौर मीनल चौबे के निर्देश जारी
महावीर जयंती 31 मार्च 2026 के अवसर पर रायपुर नगर निगम ने शहर में मांस-मटन की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। महापौर मीनल चौबे के निर्देश पर यह आदेश लागू किया गया है, जिसका सख्ती से पालन कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग और निगम अमला सक्रिय रहेगा।
UNITED NEWS OF AISA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 31 मार्च 2026 को मनाई जाने वाली महावीर जयंती के अवसर पर मांस-मटन की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। यह निर्णय मीनल चौबे, महापौर, नगर पालिक निगम रायपुर के निर्देश पर लिया गया है।
नगर निगम प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, महावीर जयंती के दिन पूरे नगर निगम क्षेत्र में स्थित सभी पशुवध गृह (स्लॉटर हाउस) और मांस-मटन की दुकानों को पूरी तरह बंद रखा जाएगा। यह आदेश छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के निर्देशों के अनुरूप लागू किया गया है।
इस संबंध में नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तृप्ति पाणीग्रही द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि 31 मार्च को शहर में कहीं भी मांस-मटन का विक्रय नहीं होना चाहिए। आदेश के पालन को सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम के जोन स्वास्थ्य अधिकारी और स्वच्छता निरीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी करेंगे।
महावीर जयंती जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व अहिंसा, करुणा और जीवों के प्रति दया का संदेश देता है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए इस दिन मांसाहार पर प्रतिबंध लगाया जाता है, ताकि धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता बनी रहे।
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई होटल, रेस्टोरेंट या दुकान इस दिन मांस-मटन की बिक्री करते पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ जप्ती (सीज) की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, संबंधित संचालकों पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
नगर निगम प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस आदेश का पालन करते हुए महावीर जयंती के पावन पर्व को शांतिपूर्ण और श्रद्धा के साथ मनाएं। साथ ही, सभी व्यापारियों से भी सहयोग की अपेक्षा की गई है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
इस प्रकार, रायपुर नगर निगम द्वारा लिया गया यह निर्णय न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान करता है, बल्कि समाज में अहिंसा और सह-अस्तित्व के मूल्यों को भी मजबूत करता है।